पंजाब में वो सरकार लाओ जो डेरा की सुने: संत गुरमीत

यानी कि इस बातों और शब्दों के सहारे सत्संग में डेरा प्रमुख गुरमीत सिंह ने कांग्रेस का नाम लिए बिना श्रद्धालुओं को एक पार्टी के पक्ष में वोट डालने का आदेश दे दिया है। उन्होंने अपने संबोधन में साध संगत का ही जिकर किया यानि जो डेरा की सुने उसका समर्थन करो। शुक्रवार को डेरा सच्चा सौदा की राजनैतिक विंग की बैठक के अब कोई मायने भी नहीं हैं। मीडिया का जिस प्रकार से इस्तेमान राजनैतिक विंग ने किया उसकी तारीफ जरूर करनी पड़ेगी। जो आया नहीं उसकी खबर समाचार पत्रों में छप गई।
राजनैतिक विंग जो चाहती थी वो ही हुआ। पहली सच्चाई है कि डेरा के पंजाब में 50 लाख श्रद्धालु है ही नहीं। अरे पूरे देश-विदेश के श्रद्धालुओं की असली संख्या ही जब सवा तीन लाख का आंकड़ा पार नहीं करती तो एक राज्य में पचास लाख कैसे हो सकते हैं। सच्चाई जाननी हो तो केंद्रीय गृह मंत्रालय से पूछ ली जीए। पंजाब में डेरा प्रेमियों की संख्या करीब 60 हजार है, इनमें से अधिकतर शुरू से ही कांग्रेसी है। करीब 18 हजार डेरा प्रेमी ही ऐसे है जिनके लिए डेरा का आदेश ही अहम होता है। ऐसे में पंजाब चुनावों में मीडिया के सहारे कांग्रेस के पक्ष में माहौल बनाने का खेल खेला जा रहा। पिछले साल डेरा में 25 जनवरी के दिन 92 हजार श्रद्धालु पूरे देश-विदेश से आए थे।
इस बार संख्या में 75 हजार तक सिमटकर रह गई। देश की सुरक्षा का जिम्मा संभाले हुए राष्ट्रीय एजेंसियों से अगर चुक नहीं होती और गृह मंत्रालय उनकी रिपोर्ट पर मोहर लगाता है तो यह आंकड़ा झूठा नहीं हो सकता। सत्संग में पंजाब से 25 हजार लोग, हरियाणा से 32 व 18 हजार लोग अन्य राज्यों से आए। डेरा सच्चा सौदा की फैसला कांग्रेस को पहले की हिसाब से कुछ सीटें और दिला सकता है लेकिन ऐसा नहीं कि सरकार गिराने या बनाने में डेरा की ही भूमिका होगी। ऐसा होता तो 2007 में अकाली-भाजपा गठबंधन की सरकार कभी नहीं आती। अगर अंधेरे में तीर चलाने वाले अनुमानों को छोड़ दे तो पंजाब चुनाव में काफी तगड़ा मुकाबला हो रहा है।












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