मिस्र में हुस्‍नी मुबारक के बाद सेना का कहर

Toll rises to 14 in heavy protest in Egypt
काहिरा। मिस्र के तानाशाह हुस्‍नी मुबारक की सत्‍ता जाने के बाद भी वहां की जनता को राहत नहीं मिल पा रही है। जब मिस्र की जनता को वहां की तानाशाही से निजात मिली थी तो उम्‍मीद जगी थी कि लोकतंत्र की स्‍थापना हो जाएगी। मगर वहां हालात वैसे ही नजर आ रहे हैं। पिछले कुछ दिनों में सेना के कहर के बीच मिस्र में कई प्रदर्शनकारियों को अपनी जान गंवानी पड़ी है।

मिस्र के सैनिकों और प्रदर्शनकारियों के बीच ऐतिहासिक तहरीर स्क्वायर पर सोमवार को लगातार चौथे दिन झड़पें हुईं जिससे तीन और लोगों की मौत हो गई। जिसके साथ ही पिछले चार दिन में मरने वालों की संख्या 14 पहुंच गई। मिस्र की जनता वहां की सेना को हटाकर वहां लोकतंत्र की स्‍थापना करने की मांग कर रही है।

अमेरिकी विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन ने मिस्र की सेना से शांतिपूर्ण अभिव्यक्ति और सभा आयोजित करने की अनुमति देने की अपील की। प्रदर्शनकारियों द्वारा कहा जा रहा है कि झड़पें पूरी रात जारी रहीं और कम से कम तीन और लोगों की मौत हो गई। सोशल नेटवर्किंग साइटों पर इस तरह की खबरें हैं कि स्क्वायर पर मौजूद प्रदर्शनकारियों को निशाना बनाने के लिए आस पास छतों पर चढ़कर गोलियां चलाई जा रही हैं।

प्रदर्शनकारियों ने ट्वीट करके कहा कि सेना तहरीर स्क्वायर से लोगों को हटाने के लिए गैसोलीन मिले पानी का उपयोग कर रही है। फरवरी से चर्चाओं के केन्द्र बने तहरीर स्क्वायर पर ये ताजा झड़पें और विवाद शुक्रवार से जोर पकड़ रहा है। इस समय मिश्र में हुस्‍नी मुबारक के निरंकुश शासन जैसे दृश्‍य नजर आ रहे हैं। जनता ने विरोध के सुर तेज करने शुरू कर दिए हैं।

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