जरूरी है शिक्षण संस्थाओं का लोकायुक्त जांच के दायरे में आना: मेहरोत्रा

ऐसे में बच्चों का भविष्य कैसा होगा। उन्होंने कहा कि मौजूदा विधानसभा के 28 सदस्यों पर गंभीर आरोप लगे हैं जिनमें 90 प्रतिशत विधायक बसपा के हैं, साथ ही 22 मंत्रियों पर लगे आरोप की जांच जारी है जिसमें वरिष्ठ मंत्री नसीमुद्दीन सिद्दीकी भी शामिल हैं। इसके अलावा 36 से अधिक नगर पालिका परिषद अध्यक्ष आरोपों से घिरे हैं। श्री मेहरोत्रा ने खेद जताया कि पांच मंत्रियों को दोष सिद्ध होने पर बर्खास्त किया गया लेकिन बादशाह सिंह, रंगनाथ मिश्र, रतनलाल अहिरवार आदि द्वारा कब्जे के जरिये हासिल की गयी संपत्ति पर से उनके कब्जे अभी तक नहीं हटाये गये और न ही कि उनके खिलाफ मुकदमे दर्ज नहीं किये गये हैं।
उन्होंने कहा कि इसी तरह राज्य मंत्री अनीस खां उर्फ फूल बाबू आदि पर गंभीर आरोप सिद्ध हुए लेकिन न तो उन्हें मंत्रिमण्डल से हटाया गया और न ही विधायक निधि का राशि वसूली गयी। लोकायुक्त ने बताया कि प्रदेश के गृह विभाग के प्रमुख सचिव कुंवर फतेह बहादुर और पुलिस महानिदेशक पर भी गंभीर आरोप लगाये गये हैं हालांकि पुलिस महानिदेशक का उत्तर मिल गया है। जन लोकपाल विधेयक का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री भी इसके दायरे में लाये जाने चाहिए।












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