राहुल का माया को जवाब, कहा दर्द जानने के लिए दर्द सहना पड़ता है

यूपी की जनता ने हमें समझाया कि नेता का काम जनता के बीच जाने का होता है, जनता की सोच समझने का होता है। और उनको प्रगति में शामिल करने का होता है। अगर एक नेता गरीबों के बीच पिछड़ों के बीच, आम आदमी के बीच नहीं जाता। तो उसे बात समझ में नहीं जा सकती। जब तक एक नेता गरीबों की हालत नहीं समझता, जब तक वो गरीबों के घर में नहीं जाता। तब तक उसे गुस्सा कभी नहीं आ सकता। गुस्सा किस बात का।
सत्ता की होड़ में यूपी का गरीब आगे नहीं बढ़ेगा, वो तभी बढ़ेगा जब उसकी सुनवाई होगी, जब उसके साथ हाथ पकड़ कर कानून बनाया जाएगा, जब उसे विकास में शामिल किया जाएगा। कुछ साल पहले बुंदेलखंड में सूखा पड़ा था, जहां भी देखो, घर के दरवाजे बंद पडे थे। दिल्ली सरकार ने मनरेगा का कानून बनाया था।
कानून कहता है कि हर एक गृहस्थी को रोजगार दिया जाना चाहिये। यही नहीं सपा-बसपा को सत्ता लोभी हो गये हैं, जिसके चलते यूपी की जनता आगे नहीं बढ़ रही है। जनता को जब तक विकास में साथी नहीं बनायेगा तब तक विकास नहीं होगा। यूपी इसलिए पिछड़ रहा है।
गौरतलब है कि देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरु के जन्मदिन पर होने वाली इस रैली में हजारों कांग्रेसी कार्यकर्ता पहुंचे है। इस जगह को चुनने के पीछे राहुल गांधी का मकसद यह है कि वो अपनी रैली के जरिये लोगों को पंडित जवाहर लाल नेहरु की याद दिलाना चाहते हैं। एक तो आज उनका जन्मदिन है दूसरा फूलपुर नेहरू का चुनाव क्षेत्र हुआ करता था।












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