यूपी की विडंबना: राहुल को ताज, तो वरुण को जूता

खबर है कि वरुण एक कार्यक्रम के सिलसिले में बरेली पहुंचे। वहां की नवाबगंज तहसील में पहुंचे ही तभी पार्टी के कुछ कार्यकर्ता वहां आये गये। ये कार्यकर्ता गांधी ने एक पूर्व निर्धारित कार्यक्रम में शिरकत करने का आग्रह करने लगे। गांधी ने इंकार कर दिया। काफी मिन्नतों के बाद भी जब वरुण गांधी नहीं माने तो कार्यकर्ता उनसे नाराज हो गये।
इन नाराज कार्यकर्ताओं ने वरूण के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और तब भी जब इन कार्यकर्ताओं का गुस्सा शान्त नहीं हुआ तो कार्यकर्ताओं ने वरुण के काफिले पर जूते-चप्पल फेंके और काले झंडे लहराए। बताया जा रहा है कि नवाबगंज नगरपालिका अध्यक्ष रवीन्द्र सिंह राठौर ने नागपंचमी मेला चौक और गुरूद्वारा पार्क के उद्घाटन के लिए वरूण गांधी से पूर्व में स्वीकृति ली थी लेकिन ऐन वक्त पर जब उन्हें लेने के लिए संयोजक आये तो वरुण गांधी ने कार्यक्रम में जाने से मना कर दिया।
पूर्व में स्वीकृति देने के बावजूद ऐनवक्त पर वरूण के मना करने पर इन लोगों को गुस्सा आ गया। लोगों का आक्रोश इसलिए भी है कि कार्यक्रम स्थलों पर शिलाओं पर वरूण गांधी का नाम भी लिखवाया गया था। सूत्रों की मानें तो किन्हीं गुटबाजियों के चलते वरूण गांधी ने अचानक कार्यक्रम रद्द कर दिया था। बहरहाल वरूण के इस फैसले से आहत कार्यकर्ता उग्र हो उठे और सांसद का काफिला रोककर उस पर जूते-चप्पल फेंके।
वहीं उत्तर प्रदेश में आलम यह है कि राहुल गांधी के लिए उनकी पार्टी के कार्यकर्ता जोरशोर से स्वागत करने में जुटे हुए हैं। सोमवार को फूलपुर में उनकी रैली है, जहां से वो अपना चुनाव प्रचार शुरू कर रहे हैं। हालांकि विरोधी दल उनके आने का विरोध कर रहे हैं। उनके लिए काले झंडे भी तैयार हैं। खैर हम आपसे सवाल पूछना चाहेंगे कि आखिर इन दोनों में इतना बड़ा फर्क क्यों है? अपने जवाब नीचे कमेंट बॉक्स में लिखें।












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