राष्ट्रीय विकास में शोध की अहम भूमिका: डॉ. भारद्वाज

उन्होंने कहा कि शोध का विषय, उसकी प्रश्नोत्तरी, शोध को करने के तरीके और विशेष क्षेत्र में जाकर वास्तविक शोध करने से उसकी विश्वसनीयता बढ़ती है और उससे प्राप्त होने वाला परिणाम देश की प्रगति में अत्यंत सहायक हो सकते हैं। उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय कांफ्रैंस में विभिन्न विशेषज्ञों द्वारा कालेधन, भ्रष्टाचार, पूंजीवाद व नव उदारवाद विषयों पर जो शोध प्रपत्र प्रस्तुत किए उनके आधार पर यदि कार्य किए जाएं तो उपरोक्त तमाम समस्याओं से देश की जनता का पीछा छूट जाएगा। उन्होंने बताया कि शोध प्रपत्र से स्पष्ट है कि यदि सरकार सेज, ऑटोमोबाइल, इंडस्ट्रीज आदि के साथ-साथ किसानों को अधिक से अधिक आर्थिक सहायता व समय पर खाद, बीज, पानी, बिजली उपलब्ध करवाए तो अनाज उत्पादन मामले में भारत को विश्व का सिरमौर बनने से कोई ताकत नहीं रोक सकती।
उन्होंने कहा कि चौधरी देवीलाल विश्वविद्यालय में भी शोध के क्षेत्र में गुणवत्तापूर्वक कार्य करवाएं जाएंगे। कुलसचिव डा. मनोज सिवाच ने कहा कि इस राष्ट्रीय कांफ्रैंस में जिन मुद्दों पर चर्चा हुई है उससे भारत की अर्थव्यवस्था व विकास से संबंधित विभिन्न मुद्दों पर गहनता से आत्ममंथन होगा और भारतीय अर्थव्यवस्था को नई दिशा व दशा प्रदान करने के महत्वपूर्ण तथ्य उभर कर सामने आएंगे। इस मौके पर डा. वी.उपाध्याय, अर्थशास्त्र विभाग के अध्यक्ष डा. अभय गोदारा, प्राध्यापक अशोक भाटिया, एमडीयू रोहतक के अर्थशास्त्र विभाग से सेवानिवृत प्रोफेसर डा. सुरेन्द्र कुमार, इंडियन इंस्टीच्यूट ऑफ पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन नई दिल्ली के रिटायर्ड प्रो. डा. कमल नयन काबरा, एच.ए.यू. हिसार के सेवानिवृत प्रो. एस.डी.चमोला, गुरूनानक देव विश्वविद्यालय अमृतसर के वाणिज्य विभाग के वरिष्ठ प्राध्यापक ए.एस.सिद्धू, नई दिल्ली के प्रो. वी.उपाध्याय आदि उपस्थित थे।












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