मायावी बसपा से एक और विधायक निलम्बित

ज्ञात हो कि इससे पहले जीतेन्द्र सिंह बब्लू, शेरबहादुर सिंह, अशोक सिंह चन्देल, अवधपाल सिंह यादव, भगवान शर्मा उर्फ गुड्डू पंडित समेत दस से अधिक विधायकों को बसपा से बाहर का रास्ता दिखाया जा चुका है। पार्टी से हटाए गये विधायकों में खास बात यह रही कि पहले उनका टिकट काटा गया जिसके बाद जब उन्होंने इसका विरोध किया बसपा सुप्रीमों ने उन्हें पार्टी से अलग कर दिया।
बसपा के प्रदेश अध्यक्ष स्वामी प्रसाद मौर्य ने कहा कि कार्यकर्ता लगातार यह शिकायत कर रहे थे कि वर्मा का आचरण पार्टी हित में नहीं है तथा उनकी गतिविधियां समाज विरोधी हो गयी हैं। इसके लिए उन्हें कई बार चेतावनी भी दी गयी थी लेकिन उनके आचरण में कोई सुधार नहीं आया है। इतना ही नहीं वर्मा पर आरोप लगा कि वह अपने विधानसभा क्षेत्र की जनता की उपेक्षा कर रहे है तथा लोगों के उत्पीडऩ तथा शोषण में लगे हुए है।
प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि वर्मा का आपराधिक इतिहास रहा है और अब भी आपराधिक गतिविधियों में लिप्त है। मालूम हो वर्मा अभी तक पार्टी के चहेते विधायक थे और उनकी सभी काली करतूतों पर पार्टी पर्दा डालती रहती थी लेकिन अचानक बदले समीकरणों ने पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष का यह कहना पड़ रहा है कि योगेश वर्मा का आपराधिक रिकॉर्ड है और वह अपनी करतूतों से बाज नहीं आ रहे हैं।
मौर्य ने अपने बयान में कहा कि 2 नवम्बर 2009 को ज्ञानेन्द्र बंसल की पत्नी लक्ष्मी बंसल की हत्या हुई तथा उनकी सम्पत्ति को कब्जा करने का प्रयास किया गया था। स्वामी प्रसाद मौर्य के अनुसार उपरोक्त डकैती एवं हत्या की विवेचना की गयी तो योगेंद्र वर्मा का नाम प्रकाश में आया। गत 7 अक्टूबर को मृतका श्रीमती बंसल के पुत्र निकुंज बन्सल ने पुलिस को एक तहरीर दी थी जिसमें उन्होंने विधायक के भाई राजन वर्मा एवं उनके अन्य सहयोगियों द्वारा उन्हें बन्दूक एवं रिवाल्वर से फायर करके जान से मारने की धमकी देने का आरोप लगाया। इस मामले में पुलिस मुकदमा दर्ज करके जांच कर रही है।
निकुंज बन्सल का कहना था कि इस घटना के पीछे भी विधायक योगेश वर्मा का हाथ है। यह सबकुछ होने के बाद योगेश को डर सताने लगा कि हो न हो अब पार्टी स्तर पर उनके खिलाफ कार्रवाई हो सकती है। इसलिए वह पार्टी के खिलाफ बयानबाजी करने लगे। उन्होंने कहा कि पार्टी द्वारा बार बार आगाह करने के बाद भी योगेश वर्मा के आचरण में कोई सुधार नहीं आ रहा था। प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि उपरोक्त तथ्यों को गंभीरता से लेते हुए पार्टी हाईकमान ने उनका टिकट काटने का फैसला ले लिया था जिसकी जानकारी उन्हें दे दी गयी थी।
योगेश वर्मा का यह कहना है कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश के बसपा प्रभारी एवं सांसद मुनकाद अली ने उनका टिकट कटवाया है तथा उनकी हत्या कराना चाहते हैं। इस तरह का आरोप पूरी तरह असत्य और आधारहीन है। उन्होंने कहा कि टिकट कटने से बौखलाए वर्मा मुनकाद अली पर इस तरह का झूठा और अनर्गल आरोप लगा रहे हैं। उन्होंने कहा कि वर्मा का यह आचरण अनुशासनहीनता की परिधि में आता है।












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