अमेरिका की न के बाद भी फिलीस्तीन को भारत का समर्थन

पिछले काफी समय से फिलीस्तीन और इजराइल में विवाद चलता रहा है। अमेरिका ने फिलीस्तीनी नेताओं से कहा था कि वे अगर अपनी सदस्यता की मांग नहीं छोड़ता है तो अमेरिका वीटो करेगा। अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने कहा कि इजराइल से बात किए बिना फिलीस्तीन को सदस्यता या राष्ट्र का दर्जा नहीं दिया जा सकता है। अब संयुक्त राष्ट्र में फिलीस्तीन को सदस्यता दिलाने के मामले पर कई बड़ी ताकतें आमने-सामने नजर आ रही हैं।
अमेरिका की ही तरह वीटो पावर रखने वाले फ्रांस ने कहा है कि अगर अमेरिका फिलीस्तीन मामले पर वीटो करता है तो हिंसा भड़क सकती है। सोमवार को इस मामले में प्रस्ताव भेजा जाएगा। फिर इस पर वोटिंग हो सकती है। अगर फिलीस्तीन को यह प्रस्ताव पारित कराना है तो उसे संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के 15 सदस्यों में से 9 वोटों की जरूरत होगी। जिसमें अहम यह है कि कोई भी देश वीटो न करे। ऐसे में अमेरिका कह चुका है कि वह इस मामले में वीटो करेगा जिससे यह साफ है कि फिलीस्तीन के इस प्रस्ताव के पास होने में मुश्किलें आ सकती हैं।












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