न्यायिक जवाबदेही बिल जनता के साथ छलावा: टीम अन्‍ना

Truce over, Anna Hazare wants judiciary under Lokpal
नई दिल्ली। टीम अन्ना ने न्यायिक जवाबदेही बिल को कूड़ा बताते हुए इसे जनता के साथ छलावा करार दिया है। साथ ही टीम अन्ना ने एक बार फिर न्यायापालिका को लोकपाल के दायरे में लाने की जोरदार वकालत की है। टीम अन्ना के सक्रिय सदस्य प्रशांत भूषण ने गांधी शांति प्रतिष्ठान में आयोजित प्रेस वार्ता में कहा कि वह सरकार को पत्र लिखकर इस पर स्पष्टीकरण की मांग करेंगे। उन्होंने कहा कि न्यायिक जवाबदेही बिल पेश कर सरकार जनता के साथ धोखा कर रही है। क्योंकि संसद की स्थायी समिति ने जो प्रस्ताव जजों के भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने के लिए किया है वह भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने के लिए नाकाफी है।

न्यायिक उत्तरदायित्व बिल पर संसदीय समिति की रिपोर्ट आने के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि इसके जरिए न्यायपालिका में भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने का कोई प्रावधान नहीं होने जा रहा है। उन्होंने कहा कि अन्ना लोकपाल के दायरे से न्यायपालिका को अलग रखने के लिए इसलिए तैयार हो गए थे, क्योंकि सरकार ने कहा था कि इसके लिए न्यायिक उत्तरदायित्व बिल में प्रावधान किया जा रहा है।

वहीं टीम अन्ना के एक सदस्य शांति भूषण ने इस बिल को देश की जनता के साथ बड़ा छलावा करार दिया। प्रशांत भूषण ने संसदीय समिति की ओर से किए गए कुछ प्रस्तावों को न्यायपालिका की स्वतंत्रता में दखल भी बताया। उनके मुताबिक न्यायपालिका पर निगरानी के लिए प्रस्तावित ओवरसाइट कमेटी में दो सांसदों और भारत सरकार के अटार्नी जनरल को शामिल किया जाना इसकी स्वतंत्रता के लिहाज से उचित नहीं है।

इस प्रेस वार्ता में टीम अन्ना के सक्रिय सदस्य अरविंद केजरीवाल औऱ पूर्व आईपीएस अधिकारी किरण बेदी भी मौजूद थीं।

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