एक अलग ही दुनिया है किन्‍नरों की

Special story on Eunuchs
किन्‍नरों की दुनिया एक अलग तरह की दुनिया है जिनके बारे में आम लोगों को जानकारी कम ही होती है। इसके अलावा किन्‍नरों पर न ही ज्यादा शोध किया गया है। भारत में बीस लाख से ज्यादा किन्‍नर है और निरंतर इनकी संख्या घट रही है, मगर फिर भी हिंजड़े को संतान मिल ही जाती है। ये उनका लालन-पालन बड़े अच्छे ढंग से करते हैं। जहां तक एक से बच्चे को बिरादरी में सम्मिलित करने की बात है तो बनी प्रथा के अनुसार बालिग होने पर ही रीति संस्कार द्वारा किसी को बिरादरी में शामिल किया जाता है।

रीति संस्कार से एक दिन पूर्व नाच गाना होता है तथा सभी का खाना एक ही चुल्हे पर बनता है। अगले दिन जिसे किन्‍नर बनना होता है, उसे नहला-धुलाकर अगरबत्ती और इत्र की सुगंध के साथ तिलक किया जाता है। शुद्धिकरण उपरांत उसे सम्मानपूर्वक ऊंचे मंच पर बिठाकर उसकी जननेन्द्रिय काट दी जाती है और उसे हमेशा के लिए साड़ी, गहने व चूडिय़ां पहनाकर नया नाम देकर बिरादरी में शामिल कर लिया जाता है।

जूतों-चप्पलों से पीटा जाता है हिंजड़े की शव यात्रा को

किन्‍नरों के बारे में कई प्रकार की भ्रांतिया आज भी हमारे समाज में मौजूद है, जैसे कि हिंजड़ों की शव यात्राएं रात्रि को निकाली जाती है। शव यात्रा को उठाने से पूर्व जूतों-चप्पलों से पीटा जाता है। किन्‍नर के मरने उपरांत पूरा हिंजड़ा समुदाय एक सप्ताह तक भूखा रहता है। इन भ्रांतियों के संबंध में किन्‍नर भी इन रस्मों को इंकार तो नहीं करते, मगर इससे नाममात्र ही बताते है। भारत के किन्‍नरों के दर्दनाक जीवन की अकाक्षाओं, संघर्ष और सदस्यों की अनदेखी करना ज्यादती होगी। किन्‍नरों के संबंध में जानकारी मिली है कि कुछ किन्‍नर जन्मजात होते है, जबकि कुछ ऐसे है कि पहले पुरूष थे, परंतु बध्याकरण की प्रकिया से किन्‍नर बने है। अपनी आजीविका चलाने वाले किन्‍नर विवाह-शादी या बच्चा होने पर नाच-गाना करके बधाई में धनराशि व वस्त्र इत्यादि लेते है, जबकि त्यौहारों के अवसर पर दुकानों इत्यादि सेभी धनराशी एकत्रित कर लेते है।

किन्‍नरों के भी होते है मुखबिर

किसी के घर विवाह है या पुत्र रतन की प्राप्ति की सूचना मौहल्लों में छोड़े मुखबिरों से उन्हें मिल जाती है। कुछ जानकारी नगर परिषद में जन्म-मरण रिकार्ड से नव जन्में बच्चे की जानकारी मिल जाती है, जबकि शादी का पता विभिन्न धर्मशालाओं एवं मैरिज पैलेस की बुकिंग से चल जाता है।

किन्‍नरों तक खबर पहुंचाने वाले को तयशुदा कमीशन भी मिलता है। किन्‍नर सरकार और समाज से सिर्फ इतना चाहते है कि समाज उनका मजाक न उड़ाए और न ही घृणा की दृष्टि से देखें, जबकि समाज के प्रति ऐसी सम्मानित भावना उपरांत भी किन्‍नर समाज में तिरस्कृत तथा बहिष्‍कृत है। इनके आधे अधूरे पन की वजह से भले ही समाज इन्हें अपना अंग मानने से इंकार करता रहे, मगर वास्तविकता यही है कि ये समाज के अंग है। अंधे, कोढ़ी और अपंग लोगों की तरह किन्‍नर भी लाचार है, जबकि किन्‍नरों को तिरस्कार व उपेक्षा की नहीं, बल्कि प्यार और सम्मान देने की जरूरत है। पढ़ें- देश दुनिया की बड़ी खबरें।

Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+