भीड़ जुटाने में फेल हुईं उमा भारती

राम लला हम आएंगे, मन्दिर वहीं बनाएंगे का नारा अब बदलकर तुम मुझे गंगा दो मैं तुम्हें सत्ता दूंगी हो गया है। भाजपा ने नारा क्या बदला नारा लगाने वाले ही गुम हो गये। राम लला के नारे लगाने वालों की जिनती भीड़ पार्टी के साथ हुआ करती थी आज उसकी आधी भी नहीं दिखायी देती। उमा के कार्यक्रमों में पार्टी के नेता व कुछ कार्यकर्र्ता जुटते हैं लेकिन आम जनता नजर नहीं आती। पार्टी के वर्तमान मुद्दों में राम मंदिर, गंगा मैया, भ्रष्टाचार व कानून व्यवस्था शामिल हैं इसे लेकर पार्टी जनता के बीच जा रही है लेकिन जनता को अपने साथ नहीं जोड़ पा रही है।
पार्टी प्रभारी ने जनता को अपने साथ लाने के लिए एक नया मुददा खोजा और गत 29 जून को गाजियाबाद के ब्रजघाट यानि गढ़मुक्तेश्वर से गंगा यात्रा निकालनी शुरू की। पहले दिन तो कुछ लोग उनके साथ दिखे लेकिन जैसे-जैसे उमा आगे बढ़ी और उन्होंने केन्द्र से लेकर प्रदेश सरकार तक आरोपों की जो कतार बनायी तो जनता उनसे दूर होती चली गयी। उमा ने जब गंगा यात्रा शुरू की थी तो लोगों को ऐसा लगा था कि हो न हो उमा की यह मुहिम गंगा का कुछ भला करेगी जब जनता को यह आभास हो गया है कि उमा गंगा के लिए नहीं बल्कि भाजपा के लिए यह कार्यक्रम कर रही हैं तो जनता ने इससे किनारा कर लिया।
उमा के अभियान के शुरूआती दौर में पार्टी के कई वरिष्ठ नेता उनके साथ नहीं आए तो विपक्षियों से इस मुद्दे को हवा दे दी आखिरकार राजनाथ सिंह को इस पर सफाई देनी पड़ी कि वह उनके साथ हैं। राजनाथ ने भले ही यह कहा कि पार्टी में कोई गुटबाजी नहीं सभी उमा के अभियान में उनके साथ है लेकिन उमा भारती का हालिया बयान कि सभी राजनैतिक दल गंगा अभियान में उनका साथ दें ने जनता के मन में कई सवाल खड़े कर दिए हैं। उधर खबर आयी कि उमा भारती ने संकट मोचन घाट पर अपने पुरानी सहयोगी गोविन्दाचार्य से मुलाकात की। उमा भारती का कहना है कि गंगा किसी पार्टी का नहीं बल्कि देश की संस्कृति का मुद्दा है।












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