यूपी में कई सपा प्रत्याशियों के टिकट छीनने की तैयारी

आगामी विधानसभा चुनाव के टिकट बंटवारे में समाजवादी पार्टी ने अन्य दलों को पछाड़ दिया। जब कांगे्रस व भाजपा में टिकट को लेकर मंथन चल रहा था, सपा प्रत्याशियों की सूची जारी कर चुकी थी। सूची जारी करने के बाद आलाकमान ने सभी को अपने-अपने क्षेत्रों में चुनावी तैयारी करने के निर्देश दिये। चुनावी तैयारी में जुटना तो दूर कई जिलों में टिकट बंटवारे को लेकर घमासान शुरू हो गया। बार-बार सपा सुप्रीमों मुलायम सिंह यादव के समझाने के बाद भी विरोध नहीं थमा। आखिरकार सपा के शीर्ष नेताओं ने फैसला लिया कि जहां अधिक विवाद हैं, वहां प्रत्याशियों को बदल दिया जाए।
यह फैसला इसलिए भी लेना पड़ेगा क्योंकि पिछले चुनाव में आपसी कलह की वजह कई जिलों में सीटें गंवानी पड़ी थीं। बहुजन समाज पार्टी से सीधी टक्कर मानते हुए सपा ने बसपा द्वारा प्रत्याशियों के एलान के बाद ही सूची जारी करनी शुरू कर दी थी।
सपा की पहली सूची गत आठ अप्रैल को जारी हुई थी, जिसमें 165 उम्मीदवारों का एलान किया गया था। वहीं 22 अप्रैल को 47 उम्मीदवारों और पांच मई को 59 प्रत्याशियों के नामों की घोषणा की गयी। यहीं से विवाद भी उठने लगा था, जिस कारण सपा को जौनपुर के पांच और इलाहाबाद के एक प्रत्याश के नाम वापस लेने पड़े थे। दो मई को सपा प्रदेश अध्यक्ष अखिलेश यादव ने बरेली के चार उम्मीदवार घोषित किये थे, जिसे सपा प्रमुख मुलायम सिंह के निर्देश पर कुछ ही घंटों बाद निरस्त कर दिया गया था। कुल मिलाकर सपा अब तक 324 प्रत्याशियों का एलान कर चुकी है। 79 सीटों पर प्रत्याशियों की घोषणा अभी बाकी है।
इन पर आलाकमान मंथन करने में जुटा है, जातीय समीकरण बिठाने का जोड़-तोड़ चल ही रहा है कि टिकट वितरण का विवाद गहराने लगा। मुलायम सिंह द्वारा इस विवादों को सुलझाने का भरकस प्रयास किया जा रहा है। सपा प्रमुख बागियों को यही सांत्वना दे रहे हैं कि सपा सरकार बनाने के लिए एकजुट रहें। सपा सरकार बनने पर सभी का ध्यान रखा जायेगा। तमाम कोशिशों के बाद भी कोई हल निकालता न देख, सपा प्रमुख पिछली गलती दोहराना नहीं चाहते। फिलहाल यह तय किया गया है कि जिन सीटों पर विवाद अधिक है, वहां प्रत्याशियों का बदलना ही होगा।












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