रामदेव के समर्थन में राजघाट पर प्रदर्शन

इस घटना के विरोध में शनिवार को राष्ट्रीय स्वाभिमान मंच के संयोजक के एन गोविंदाचार्य की अगुवाई में राजघाट पर मौन प्रदर्शन किया गया। इनका कार्यक्रम जंतर मंतर जाना था पर जब ये प्रदर्शनकारी जंतर-मंतर की तरफ कूच करने लगे तो पुलिस ने इन्हें रोक दिया और गोविंदाचार्य समेत कई लोगों को हिरासत में ले लिया गया।
इस प्रदर्शन में केएन गोविंदाचार्य के आलावे वरिष्ठ पत्रकार वेद प्रताप वैदिक, रामबहादुर राय, पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ. संजय पासवान, पूर्व केंद्रीय मंत्री आरिफ मोहम्मद खान और एनसीईआरटी के पूर्व अध्यक्ष जेएस राजपूत शामिल थे।
प्रदर्शन से पहले सभा में तब्दील जनसमूह को संबोधित करते हुए केएन गोविंदाचार्य ने कहा कि हर आंदोलन को कुचलने के लिए सरकार लोगों पर अत्याचार करती है, लेकिन उसे एक बात समझ लेनी चाहिए सरकार के ऐसे अत्याचारों से जन आंदोलन दबता नहीं बल्कि और विप्लव का रूप लेता है। रामलीला मैदान में जिस प्रकार शांति पूर्वक अनशन कर रहे महिलाओं, बच्चों और पुरुषों पर सरकार ने अत्याचार किया उससे दुनिया में मानवता का सिर शर्म से झुक गया है।
वहीं जेएस राजपूत ने कहा कि रामलीला मैदान में निहत्थे, गहरी नींद में सोए हुए भूखे प्यासे लोगों पर लाठीचार्ज करना 21वीं के सभ्य समाज पर घोर कलंक है। सरकार के इस गलत कृत्य के कारण विदेशों और विदेशी मीडिया में देश की छवि खराब हुई है। उन्होंने कहा कि भारत के इतिहास में या यूं कहें सबसे खराब समय आपातकाल के दौरान भी इस तरह निर्दोष और निहत्थे लोगों पर लाठीचार्ज नहीं किया गया।
स्वामी रामदेव का अभियान न तो किसी पार्टी के खिलाफ है और न ही सरकार के खिलाफ। उन्होंने जिन मुद्दों को उठाया है उसे केंद्र के चार मंत्रियों ने भी बेहतर करार दिया था। उन्होंने कहा कि एक बात समझ में नहीं आती कि ऐसी कौन सी बात सरकार को परेशान कर दी कि उसे रात्रि के साढ़े ग्यारह बजे 99 फीसदी मांगे माने जाने का पत्र सरकार भेजती है और ठीक एक घंटे बाद सरकार पुलिस से गहरी नींद में सो रहे निहत्थे लोगों पर हमला करवा देती है।












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