गंगा को बचाने के लिए अनशन कर रहे संत निगमानंद की मौत

उन्होंने गंगा को प्रदूषण मुक्त करने के लिए और अवैध खनन के खिलाफ अनशन किया था। वो 19 फरवरी से अनशन कर रहे थे और सोमवार को 115 दिन बाद बाबा निगमानंद की मौत हो गई । उनकी मौत ये साबित करने के लिए काफी है कि उनकी लड़ाई को इसलिए सुर्खियां नहीं मिली क्योंकि उन्होंने ना तो किसी राजनीतिक पार्टी से संपर्क साधा और ना ही मीडिया में आकर शोर मचाया।
रामदेव को मिली इज्जत...निगमानंद को मिली बेइज्जती
उनकी हालत खराब होने पर उन्हें वहीं भर्ती कराया गया था जहां बाब रामदेव का इलाज हो रहा था। ताज्जुब ये है कि हर आम से खास आदमी बाबा से मिलने पहुंचां लेकिन किसी ने भी संत निगमानंद की सुध नहीं ली। बाबा निगमानंद ने खनन बंद कराने और हिमालियन स्टोन क्रेशर को कुंभ क्षेत्र से हटाने की मांग को लेकर अनशन किया था। वो पिछले 2 मई से कोमा में थे। और मंगलवार यानी आज सुबह उनकी मौत हो गई।
गुमनामी में खो गया निगमानंद का अनशन
ऋषिकेश के एडीएम प्रताप शाह के मुताबिक निगमानंद पिछले 68 दिन से अनशन पर थे। निगमानंद की मौत से व्यथित मातृसदन के अध्यक्ष शिवानंद सरस्वती ने अस्पताल प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। शिवानंद ने कहा है कि उनके बाबा को जहर देकर मारा गया है। फिलहाल निगमानंद का आज सुबह पोस्टमार्टम हुआ है।
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