गुमनाम पत्र ने खोले अरुणिमा के कई राज़
लखनऊ। लूट का विरोध करने पर बदमाशों द्वारा राष्ट्रीय स्तर की खिलाड़ी आरुणिमा सिन्हा उर्फ सोनू सिन्हा को चलती ट्रेन से बाहर फेंके जाने के मामले ने एक नया मोड़ ले लिया है। अरुणिमा और उसके परिजनों के विरोधाभासी बयान पुलिसिया जांच को गुमराह कर रही हैं। वहीं दूसरी तरफ छानबीन के बाद जो बातें सामने आ रही हैं उससे तो अरुणिमा और
उसके परिवार वालों पर ही सवालिया निशान खड़ा होता दिख रहा है।
बदलते बयानों में सरकारी रेल पुलिस (जीआरपी) की जांच टीमें उलझ गई हैं। बयानों के अंतर का विश्लेषण कर सही तस्वीर लेने के लिए बयान लेते वक्त वीडियो क्लिपिंग का सहारा लिया जा रहा है। उसके मोबाइल फोन सेट की फोरेंसिक जांच कराते हुए मिटाए गए डाटा से खोजबीन की कोशिशें तेज हो गई हैं। आईए हम उन बयानों पर नजर डालतें हैं जो घटना के बाद अरुणिमा ने पुलिस को दर्ज कराया था।
घटना के बाद अरुणिमा ने पुलिस को बताया कि 11 अप्रैल को वह सीआईएसएफ की परीक्षा देने के बाद पदमावत एक्सप्रेस से घर वापस लौट रही थी कि मुरादाबाद के पास ट्रेन में चार पांच लुटेरों ने उसके गले से चेन लूटने की कोशिश की और विरोध करने पर बदमाशों ने उसे ट्रेन से नीचे फेंक दिया। इस मामले में आईजी रेलवे अरविंद कुमार जैन का कहना है कि छानबीन में जो बातें सामने आई हैं उससे साफ जाहिर होता है कि ट्रेन में इस तरह की कोई वारदात नहीं हुई।
उन्होंने कहा कि सबसे पहले तो यह बात ही गलत है कि 11 अप्रैल को सीआईएसएफ की परीक्षा थी। श्री जैन का कहना है कि चेन स्नेचिंग की वारदाता को अंजाम देने के लिये कभी पांच लुटेरे नहीं आते। उन्होंने बताया की प्रारम्भिक छानबीन के बाद यह बात भी सामने आई है कि अरुणिमा बिना टिकट के यात्रा कर रही थी।
श्री जैन का कहना है कि सभी स्टेशनों पर पूछताछ की गई है मगर किसी भी सबूत का न मिलना अरुणिमा प्रकरण में दाल में काला होना दर्शा रहा है। वहीं दूसरी तरफ इस पूरे प्रकरण के बाद जीआरपी के आला अफसर को मिला गुमनाम पत्र एक अलग ही राग अलाप रहा है। घटना के बाद जीआरपी के आला अफसर को गुमनाम चिट्ठी मिली। इसमें अरुणिमा के परिवार को जालसाज बताया गया है और इसकी गहराई से जांच का सुझाव भी है।
पत्र लिखने वाले ने खुद का नाम योगेश त्रिपाठी लिखा है, लेकिन पता नहीं लिखा है। उसने खुद को घटना का चश्मदीद बताते हुए लिखा है कि उस दिन ट्रेन में अरुणिमा अकेली सफर नहीं कर रही थी, बल्कि उसका कथित जीजा ओमप्रकाश त्रिपाठी उसके साथ था। ओमप्रकाश और सोनू में रास्ते भर तकरार चली। तकरार बढ़ने पर ओमप्रकाश ने सोनू को ट्रेन से धक्का दे दिया। पत्र में ओमप्रकाश को सीआरपीएफ से निलंबित व सरकारी कागजों का जालसाज बताया गया है।
साथ ही कहा गया है कि सीआरपीएफ की कार्रवाई से बचने के लिए उसने फर्जी मेडिकल सार्टिफिकेट भी पेश किया था। पत्र के मुताबिक सोनू की मां मधुबाला हत्या के एक मामले में जेल भी जा चुकी हैं। योगेश ने इस पत्र की प्रतिलिपि रेल मंत्री ममता बनर्जी, केंद्रीय खेल मंत्री अजय माकन समेत कई रेल व जीआरपी अफसरों को संदर्भित करते हुए लिखा है कि सोनू को लेकर किसी भी घोषणा से पूर्व इन तथ्यों की गहन पड़ताल की जानी चाहिए।












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