विवादों की आंधी भी कम नहीं कर पायी सत्‍य साईं के प्रति आस्‍था

पुट्टापर्थी। अनंतपुर के सत्‍य साईं बाबा के प्रति करोड़ों भक्‍तों में इतनी आस्‍था है कि वे दिन रात सोते जागते बाबा के नाम का जप करते रहते हैं। बाबा के 84 वर्ष के जीवन में विवादों की कई आंधियां आयीं, लेकिन लोगों के मन में उनके प्रति आस्‍था को कम नहीं कर पायीं। बाबा पर लगाये गये आरोप चुनौतियां बनकर सामने आये। बाबा ने हमेशा उन्‍हें मुस्‍कुराते हुए स्‍वीकार किया। उनके प्रति आस्‍था ही है, जो हजारों लोगों को आज पुट्टापर्थी की खींच लायी है।

पुट्टापर्थी में हजारों लोग पहुंच चुके हैं। कस्‍बे में धारा 144 लागू होने के बावजूद बाबा के भक्‍त उनके दर्शन को लालायित हैं। जरा सोचिए ऐसे बाबा के अंदर कोई तो दिव्‍य शक्ति थी ही, जिसकी वजह से 168 देशों के लोग उन्‍हें भगवान मानने लगे। इस दिव्‍य शक्ति को मीडिया व कई संस्‍थाओं ने ललकारा, लेकिन फेल हो गये।

बाबा पर लोगों के सामने जादू टोना कर बेवकूफ बनाने से लेकर यौन उत्‍पीड़न तक करने तक के आरोप गढ़े गये, लेकिन एक भी आरोप कभी सिद्ध नहीं हो पाये। बाबा की खासियत भी देखिये, उन्‍होंने आरोप लगाने वालों के खिलाफ कभी एक शब्‍द नहीं कहा।

1968 में बाबा पर बीबीसी ने एक डॉक्‍यूमेंट्री बनायी, जिसमें उन पर आरोप लगाया गया कि वो जादू टोना करके हाथ से भभूत निकालते व चीजों को प्रकट कर देते हैं। जुलाई 2001 में स्‍वीडन के एक व्‍यक्ति ने बाबा पर यौन उत्‍पीड़न का आरोप लगाया। उस दौरान कई देशों के सांसद बाबा के खिलाफ एक जुट हो गये थे। इसके अलावा कई भक्‍तों ने बाबा पर आरोप लगाया कि वे युवतियों का यौन शोषण करते हैं। उन आरोपों के बाद साईं के ट्रस्‍ट ने स्‍वीडन में स्‍कूल व संस्‍था दोनों को बंद कर दिया।

1970 में एक ब्रिटिश लेखक टॉल ब्रोक ने सत्य साईं बाबा को सेक्स का भूखा भेड़िया करार दिया था। उनके खिलाफ विदेश में कई केस भी दर्ज किए गए थे।

2004 में मार्क रोच नाम के एक भक्‍त ने बाबा पर आरोप लगाया कि वो 1969 से उनका उत्‍पीड़न कर रहे थे। 2006 में अमेरिका के एक अखबार ने बाबा के खिलाफ लेख छापा जिसमें कहा गया कि बाबा कोई चमत्‍कार नहीं करते, वो सिर्फ जादू के माध्‍यम से लोगों को सम्‍मोहित करते हैं।

विदेशों की बात तो दूर कई भारतीय टीवी चैनलों ने भी बाबा की सभाओं की तस्‍वीरें अलग-अलग ऐंगल से लेकर उन पर जादू के माध्‍यम से भक्‍तों को बेवकूफ बनाने के आरोपों से भरी खबरें चलायीं।

इस पूरे अंतराल में चाहे वो बीबीसी हो या स्‍वीडन के सांसद और या फिर भारतीय चैनल। कोई भी भक्‍तों की अटूट आस्‍था को डगमगा नहीं सका। खास बात यह है कि बाबा पर कोई भी आरोप किसी कोर्ट में सिद्ध नहीं हुए। भक्‍तों की संख्‍या लगातार बढ़ती गई। भारत, नेपाल, श्रीलंका से लेकर अमेरिका, जापान तक भारत के भक्‍त आज उनकी आत्‍मा की शांति के लिए प्रार्थनाएं कर रहे हैं।

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