'कुचल डालो ऑनर किलिंग को'

'कुचल डालो ऑनर किलिंग को'
सुशीला सिंह

बीबीसी संवाददाता, दिल्ली

ऑनर किलिंग के मामले हरियाणा ही नहीं पंजाब,पश्चिमी उत्तरप्रदेश से भी आते रहते है. सुप्रीम कोर्ट ने ऑनर किलिंग या इज्ज़त के नाम पर हत्याओं के ख़िलाफ़ सख़्त रूख अपनाते हुए कहा है कि इस कुप्रथा को बिना किसी रियायत के जड़ से उखाड़ फेंकना होगा. सुप्रीम कोर्ट के इस निर्णय का स्वयंसेवी संस्थांओं ने स्वागत किया है.

जस्टिस मार्कडेय काटजू और जस्टिस ज्ञानसुधा मिश्रा की खंडपीठ ने मंगलवार को प्रशासन और पुलिस अधिकारियों से कहा कि वे ऐसी घटनाओं को रोकने लिए कड़े कदम उठाएं. अदालत का कहना था कि जिस भी ज़िले में ऐसी घटना हो वहां के ज़िलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक को तत्काल प्रभाव से हटाया जाए.

अदालत का कहना था कि अगर पहले से इस तरह की घटना की जानकारी होने के बावजूद किसी अफ़सर ने ऑनर किलिंग रोकने के लिए ज़रूरी कदम नहीं उठाया हो तो सरकार उसके ख़िलाफ़ विभागीय कार्रवाई करे. हरियाणा के कई गांवो में खाप पंचायतों के आदेश के बाद नवविवाहितों को अपना गांव छोड़कर बाहर जाकर बसना पड़ा था.

हरियाणा के खेड़ी गांव के सतीश ने साल 2007 में प्रेमविवाह किया था. लेकिन खाप पंचायत ने ये कह कर नवविवाहित जोड़े को गांव से निकाल दिया था कि वह एक ही गोत्र के है. सतीश का कहना है,"सुप्रीम कोर्ट के फैसले से मैं खुश हूं और मेरा डर भी कम हुआ है लेकिन जब तक खाप पंचायत हमें अपने गांव वापस लौटने की अनुमति नहीं देगी हम नहीं लौटेगे. "

सतीश का कहना है कि उनकी पत्नि का गोत्र उनसे अलग है और वह पिछले डेढ़ साल से दूसरे गांव में रह रहे है. उनका कहना था कि वो खाप पंचायत के फैसले के ख़िलाफ़ चढ़ीगढ़ के हाईकोर्ट में क़ानूनी लड़ाई भी लड़ रहे है. खाप पंचायतों का कोई सवैंधानिक रूप नहीं होता. खाप या कट्टा पंचायतों को कंगारू अदालतें बताते हुए अदालत ने कहा है कि ये अदालतें क़ानून अपने हाथ में लेती है और ये पूरी तरह गैरकानूनी है.

एक गोत्र या फिर बिरादरी के सभी गोत्र मिलकर खाप पंचायत बनाते हैं. ये पाँच गाँवों की हो सकती है या 20-25 गाँवों की हो सकती है और इनका कोई संवैधानिक रूप नहीं होता. हरयाणा के रोहतक ज़िले में काम कर रही अखिल भारतीय जनवादी महिला समिति की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष जगमति सांगवान का कहना है कि ये फैसला उचित और सही समय पर आया है.

जगमति सांगवान का कहना था पहले जब भी वह पीड़ित परिवारवालों को न्याय दिलाने के लिए उपायुक्त या पुलिस अधीक्षक के पास जाती थी तो उन्हें ये कहा जाता था कि वह तब तक कोई कार्रवाई नहीं करेंगे जब तक शिकायककर्ता हमारे पास न आए. आलम ये होता था कि शिकायतकर्ता में इतनी हिम्मत ही नहीं होती थी कि वह शिकायत करे. ऐसे में सुप्रीम कोर्ट का फैसला सराहनीय है.

उनका कहना था,"राज्य स्तर पर जो मुख्य राजनैतिक पार्टियां हैं या राज्य में जो प्रशासन तंत्र है उनपर सही इच्छाशक्ति के साथ हस्तक्षेप नहीं किया जाता था. वहां खाप पंचायते का़नून व्यवस्था के समानांतर काम करती है और जिसको भी चाहे अपना शिकार बना लेती थी. लेकिन अब सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद इन पर दबाव बना है कि उनपर भी कार्रवाई हो सकती है. इससे वह काम करने के लिए मजबूर होगें और साथ में जब जनदबाव होगा तो निश्चिततौर पर उन पर अंकुश लगेगा."

जगमति सांगवान का कहना था कि उनकी संस्था ने रोहतक के आस-पास के गांवो से जो आंकड़े इकट्ठा किए है उसके मुताबिक पिछले साल जनवरी से अगस्त महीने में इज्ज़त के नाम पर 13 हत्याएं की गई वहीं 21 मामलों में परिवार या नवविवाहितों को गांव से बहिष्कृत किया गया.

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इज्जत के नाम पर हो रही इन हत्याओं में कुछ भी सम्मानजनक नही है बल्कि ये बर्बर और शर्मनाक तरीके से की गई हत्या है. पुलिस पर अक्सर आरोप लगा है कि उन्होंने समय रहते कार्रवाई नहीं की. पूर्व वरिष्ठ पूलिस अधिकारी किरन बेदी ने भी सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर सहमति जताते हुए कहा है कि जब भी ऐसी घटनाएं होती है उसके प्रति ज़िलाधिकारियों की जवाबदेही बनती है.

उनका कहना था,"मैं शुरू से ये कहती आई हूं कि जब भी ऐसी घटनाएं होती है वो ज़िला प्रशासन की विफलता से होती है और इसके लिए ज़िला मेजिस्ट्रेट, पुलिस अधीक्षक और ज़िला अधिकारी ज़िम्मेदार होते है. ये अधिकारी राजनैतिक दबाव के चलते या निजी स्वार्थ के चलते अपनी ज़िम्मेदारी से पीछे हटते है इसलिए ऐसी घटनाएं होती है."

ऑनर किलिंग के मामले हरियाणा ही नहीं पजांब, पश्चिमी उत्तरप्रदेश से भी आते रहते है. इतना ही नहीं राजधानी दिल्ली में भी हाल के कुछ सालों में इज्ज़त के नाम पर हत्याओं के मामले दर्ज किए गए थे. रविवार को ही हरियाणा के भिवानी ज़िले के रनिला गांव में एक ही आदमी ने दो महिलाओं की लाठी से पीट-पीट कर हत्या कर दी थी.

इनमें से एक महिला इस व्यक्ति की चाची थी और दूसरी पड़ोसन. इन दोनों महिलाओं पर कथित रूप से देहव्यापार से जुड़े होने का आरोप था. इस सिलसिले में अभियु्क्त को गिरफ़्तार कर लिया गया है.

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