बिहार में पंचायतों के लिए मतदान

बिहार में पंचायतों के लिए मतदान
मणिकांत ठाकुर

बीबीसी संवाददाता, पटना

बिहार में पंचायती चुनावों के लिए मतदान शुरु हो गया है. बिहार में तीन स्तरीय पंचायती निकाय के चुनाव से जुड़े मतदान का दौर बुधवार 20 अप्रैल से शुरू होकर लगभग एक महीने यानी 18 मई तक चलेगा. मतदान दस चरणों में संपन्न होगा और इसके लिए राज्य की कुल 8442 ग्राम पंचायतों में एक लाख 17 हज़ार मतदान केंद्र बनाए गए हैं.

पंचायती निकाय के मुखिया, सरपंच, पंचायत समिति सदस्य और ज़िला परिषद् सदस्य चुनने के लिए राज्य के 38 ज़िलों के 618 प्रखंडों को दस समूहों में बांटा गया है. पहले समूह के जिन 57 प्रखंडों को पहले दौर में होने वाले मतदान के अंतर्गत रखा गया है, वहाँ 20 अप्रैल को वोट डाले जाएंगे.

उसके बाद अन्य प्रखंडों में 24, 27 और 30 अप्रैल के अलावा तीन, छह, नौ, बारह, पंद्रह, और अठारह मई को मतदान होगा. राज्य के सिर्फ शिवहर ज़िले में पांचवें दौर से वोटिंग शुरू होगी, जबकि अन्य सभी 37 ज़िलों से जुड़े प्रखंडों को अलग-अलग मतदान के सभी दस चरणों के तहत समेटा गया है.

ऐसा इसलिए किया गया है क्योंकि एकसाथ पंचायत चुनाव संपन्न कराने के लिए जितनी बड़ी तादाद में सुरक्षा बलों की ज़रुरत बताई गई, उतनी उपलब्धता संभव नहीं हो पाई. जो केंद्रीय सुरक्षा बल राज्य में पहले से उपलब्ध हैं, उनके अलावा कोई अतिरिक्त केंद्रीय अर्द्धसैनिक बल इस मौक़े पर भेजने को केंद्र सरकार तैयार नहीं हुई.

कारण यह बताया गया कि कुछ राज्यों में हो रहे विधानसभा चुनाव के सिलसिले में अतिरिक्त अर्द्धसैनिक बल भेजने पड़े हैं. इसलिए ज़ाहिर है कि राज्य सरकार अपने पास उपलब्ध पुलिस फ़ोर्स और होमगार्ड के बूते ही पंचायत चुनाव में सुरक्षा प्रबंध करने को विवश हुई है. ऐसे में माओवादी प्रभावित इलाकों से चुनावी हिंसा की आशंका वाली जो खबरें आ रही हैं, वो राज्य सरकार के लिए चिंता का कारण बन गई हैं.

एक दिलचस्प बात यह है कि इसबार मुखिया और ज़िला परिषद् सदस्य पद के लिए उम्मीदवारों की भारी भीड़ दिख रही है. सबसे ज़्यादा मुखिया बनने के लिए होड़ मची है, क्योंकि पिछले पांच वर्षों में अवैध कमाई से मालामाल होने वाले पंचायत-कर्मियों की सूची में मुखिया को लोगों ने सबसे ऊपर पाया है.

कुछ अपवाद को छोड़कर बाक़ी तमाम मुखिया पदधारियों पर ग्रामीण विकास योजनाओं में भारी लूट मचाने के आरोप सरेआम लगते रहे हैं. वहीँ दूसरी तरफ़ सरपंच यानी ग्राम कचहरी के प्रमुख का पद चूँकि वित्तीय अधिकार रहित एक बिना कमाई वाला पद माना जाता है, इसलिए सरपंच - प्रत्याशियों की तादाद बहुत घट गयी है.

मुखिया और सरपंच के लिए बराबर- बराबर यानी 8442 पद हैं, लेकिन अंतर देखिये कि सरपंच पद के लिए लगभग 36 हज़ार प्रत्याशी हैं, जबकि मुखिया पद के लिए 79 हज़ार से भी अधिक उम्मीदवार चुनाव मैदान में हैं.

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