हनुमान जयंती : मंगल को जन्मे मंगल ही करते मंगलमय भगवान...

आपको पता है कि हनुमान जी हमेशा लाल रंग में ही क्यों दिखायी देते हैं? एक बार बचपन में हनुमान जी ने अपनी मां को मांग में सिंदूर लगाते हुए देखकर पूछा तो उनकी मां ने कहा कि वो अपने प्रभु यानी अपने पति को खुश करने और उनकी लंबी आयु के लिए अपनी मांग में सिंदूर लगाती है, इसलिए हनुमान जी ने सोचा कि जब चुटकी भर सिंदूर से ही मां के भगवान प्रसन्न हो सकते हैं तो मैं अपने पूरे शरीर को सिंदूर से रंग लगा लेता हूं, तभी से हनुमान जी हमेशा लाल सिंदूर में रंगे हुए दिखायी देते हैं।
हनुमानजी बुद्धि और बल के दाता हैं। उत्तरकांड में भगवान राम ने हनुमानजी को प्रज्ञा, धीर, वीर, राजनीति में निपुण आदि विशेषणों से संबोधित किया है। हनुमानजी बल और बुद्धि से संपन्न हैं। हनुमान को मनोकामना पूर्ण करने वाला देवता माना जाता है, इसलिए मन्नत मानने वाले अनेक स्त्री-पुरुष हनुमान की मूर्ति की श्रद्धापूर्वक निर्धारित प्रदक्षिणा करते हैं। कई लोगों को आश्चर्य होता है कि, जब किसी कन्या का विवाह न तय हो रहा हो, तो उसे ब्रह्मचारी हनुमान की उपासना करने को कहा जाता है।
चैत्र पूर्णिमा के दिन हनुमान जयंती मनाई जाती है। प्राय: शनिवार व मंगलवार हनुमान के दिन माने जाते हैं। इस दिन हनुमानजी की प्रतिमा को सिंदूर व तेल अर्पण करने की प्रथा है। कुछ जगह तो नारियल चढाने का भी रिवाज है।












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