जनता को भड़काने के आरोप में बसपा मंत्री गिरफ्तार, पार्टी से निष्कासित

वहीं प्रदर्शन में शामिल विद्युत निगम मेरठ में तैनात अधीक्षण अभियंता आरपी सिंह को भी निलंबित कर गोंडा स्थानांतरित कर दिया गया। इस मामले में विनोद तेजियान ने कहा कि यह उनके खिलाफ राजनीतिक षड्यंत्र है। जीआपी ने भी सभी आरोपियों के खिलाफ संगीन धाराओं में मुकदमा दर्ज किया है। पदोन्नति में आरक्षण की बहाली की मांग को लेकर रविवार को रैली करने के बाद हजारों दलितों ने कचहरी पुल के नीचे रेलवे ट्रैक जाम कर दिया था। आरपीएफ की ओर से वन निगम के उपाध्यक्ष रहे विनोद तेजियान समेत 15 के खिलाफ रेलवे एक्ट की धारा 174 के तहत रिपोर्ट दर्ज की गई थी, जबकि 500 आरोपी अज्ञात बताए गए थे।
सोमवार की सुबह से ही आरपीएफ और सिविल पुलिस ने आरोपियों की घेराबंदी शुरू कर दी। बड़ी संख्या में पुलिस बल के साथ अधिकारियों ने विनोद तेजियान को उनके देवबंद स्थित आवास से गिरफ्तार कर लिया। इस दौरान विरोध कर रहे उनके समर्थकों और पुलिस के बीच नोकझोंक भी हुई। बाद में दलितों ने देवबंद हाईवे जाम कर दिया। उधर, सपा के प्रदेश सचिव एवं राष्ट्रीय वाल्मीकि सेना के प्रदेश उपाध्यक्ष भारत भूषण भी गिरफ्तार कर लिए गए। दोनों को कड़ी सुरक्षा के बीच कोर्ट में पेश किया गया तो यहां भी उनके समर्थकों ने कचहरी से बाहर नारेबाजी की।
भारी गहमागहमी के बीच दोनों को जमानत पर रिहा कर दिया गया। उधर, बसपा हाईकमान ने विनोद तेजियान को वन निगम के उपाध्यक्ष पद से हटाने के साथ ही उन्हें पार्टी से बाहर कर दिया। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के प्रभारी मुनकाद अली की ओर से जारी निष्कासन पत्र में उनके अलावा रामपाल, राजकुमार तथा संजय तेगपाल को भी पार्टी विरोधी गतिविधियों में लिप्त होने पर बाहर का रास्ता दिखाया गया है।












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