जापान में विकिरण रोकने का काम जारी

टोक्यो के उत्तर पूर्व में स्थित फुकुशिमा शहर में शुक्रवार को आए भूकंप में परमाणु संयंत्र को ख़ासा नुकसान पहुंचा था. बड़ी संख्या में इंजीनियर और अन्य कर्मचारी समुद्र से पानी परमाणु संयंत्र पर डाल रहे हैं ताकि उसका तापमान कम किया जा सके और संयंत्र को गलने से रोका जा सके.
संयंत्र के आपरेटरों का कहना था कि एक समय संयंत्र के आसपास विकिरणों का स्तर वैध सीमा से अधिक चला गया था. शनिवार को रिएक्टर की एक इमारत की छत ज़बर्दस्त विस्फोट के कारण उड़ गई थी. अधिकारियों का कहना है कि ऐसा फिर हो सकता है लेकिन उनका कहना था कि इससे विकिरण फैलने का खतरा नहीं है.
इस बीच ओनागावा और तोकाई में परमाणु संयंत्रों को कम नुकसान पहुंचने की बात कही गई है. शुक्रवार को जापान में आए भूकंप और सुनामी के कारण जान माल का भारी नुकसान हुआ है. अभी भी देश के कई इलाक़ों में बिजली नहीं है क्योंकि देश में तीस प्रतिशत बिजली परमाणु संयंत्रों से आती है.
देश के कई परमाणु संयंत्रों को बंद किया जा रहा है ताकि भूकंप के कारण उन्हें हुई क्षति का जायज़ा लिया जा सके. प्रधानमंत्री नाओतो कान ने इस भूकंप और सुनामी को द्वितीय विश्व युद्ध के बाद जापान की सबसे बड़ी आपदा करार देते हुए कहा कि लोग एक हों और पुनर्निर्माण में लग जाएं.
दुनिया भर में चिंता
जापान में परमाणु संयंत्रों को हुए नुकसान के बाद पूरी दुनिया में परमाणु ऊर्जा को लेकर नई बहस छिड़ गई है. जर्मनी की चांसलर एंगेला मर्कल ने कहा कि जापान का संकट पूरी दुनिया के लिए एक गंभीर मोड़ है
उनका कहना था कि जर्मनी के परमाणु संयंत्रों की सुरक्षा मापदंडों की समीक्षा की जाएगी. एंगेला ने यह बात ऐसे समय में कही जब एक दिन पहले हज़ारों की संख्या में लोगों ने जर्मनी के परमाणु संयंत्रों को और लंबे समय तक चलाने की सरकार की योजना का विरोध किया था.
उधर अमरीका में सीनेटर जो लिबरमैन ने कहा है कि अमरीका को जापान में हुई घटनाओं से सबक लेना चाहिए और तब तक परमाणु संयंत्रों के विकास का काम रोकना चाहिए जब तक जापान से सभी सबक न ले लिए जाएं. परमाणु ऊर्जा का विरोध करने वालों का कहना है कि यह प्रौद्योगिकी ख़तरनाक है और इस पर काबू करना अत्यंत मुश्किल.












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