डीएमके से झगड़े में कांग्रेस के स्वाभिमान की जीत

13 अप्रैल को घोषित तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के मद्देनजर सीटों के लिए भिड़ी कांग्रेस ने आखिरकार डीएके के सारे काले कारनामों का हिसाब वसूल लिया है। कांग्रेस पर डीएम की गठबंधन तोड़ने की धमकी का कोई असर नहीं दिखा और एक हफ्ते के फुल ड्रामे के बाद डीएमके ने अपनी मजबूरी को स्वीकार कर कांग्रेस को उसकी मनचाही 63 सीटें थमा दी हैं।

इन 63 सीटों को हासिल करने के लिए देश की दो महत्वपूर्ण पार्टियों ने जितना मोल-तोल किया उसको देख कर तो मछली बाजार की चक-चक भी गरिमापूर्ण लगने लगी। कांग्रेस अध्यक्षा सोनिया गांधी ने डीएमके अध्यक्ष करुणानिधि से साफ-साफ कह दिया कि सरकार चाहे जाए या रहे वह अब डीएमके के आगे समर्पण नहीं करेंगी। सोनिया गांधी ने कहाकि वह डीएमके की गिरावट देख कर दंग हैं और अब डीएमके को ही उनकी बात माननी होगी।

डीएमके ने कांग्रेस पर दबाव बनाने के लिए हर चाल चली। उसने अपने मंत्रियों को दिल्ली बुला कर इस्तीफा देने की नाटकक खेला और एक ओर प्रणब मुखर्जी और मनमोहन सिंह से वार्ता का ठोंग भी रचा। आखिरकार इतनी गिरावट देख कर सोनिया गांधी ने डीएमके से कहाकि ना तो ये चुनावी लालच है और ना ही मेरी नाक की बात है दरअसल सही बात तो यह है कि डीएमके ने देश की सबसे बड़ी रा्ट्रीय पार्टी की प्रतिष्ठा को चोट पहुंचाई है इसलिए अब आगे कोई समझौता नहीं होगा। डीएमके को कांग्रेस से रिश्ता रखना है तो उसे बात माननी ही होगी। सोनिया के इस अल्टीमेटम बाद डीएमके को अपने घुटने टेकने पर मजबूर होना पड़ा और इस कांग्रेस-डीएमके विवाद में कांग्रेस अ ध्यक्षा के स्वाभिमान की जीत हुई।

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