पूर्वोत्तर के विद्रोहियों पर बर्मा की कार्रवाई

सुबीर भौमिक
बीबीसी संवाददाता, गुवाहाटी
बांग्लादेश ने भी 2009 से अपने इलाके में स्थित विद्रोहियों के ठिकानों के खिलाफ़ अभियान छेड़ रखा है.
भारत के पूर्वोत्तर हिस्से में अलग राज्य की मांग कर रहे विद्रोहियों ने कहा है कि पड़ोसी देश बर्मा में स्थित उनके कुछ ठिकानों पर हमले किए गए हैं.
‘नेशनल सोशलिस्ट काउंसिल ऑफ़ नगालैंड’ यानी एनएससीएन के खपलांग गुट के प्रवक्ता ने बताया कि सागाइंग प्रमंडल के दूर दराज़ इलाके में तीन कैंपों पर आधी रात के बाद विस्फोटकों से हमला किया गया.
एनएससीएन के प्रवक्ता पी टिख़ाक ने कहा, ‘हमें आशंका है कि इन कैंपों पर बड़ा हमला किया गया है.’
टिख़ाक ने बीबीसी से बातचीत में कहा कि उन्हें लगता है बर्मा की सेना के लगभग 3000 सैनिकों ने इस हमले में हिस्सा लिया है.
उन्होंने कहा, ''हमें स्थिति के बारे में पूरी जानकारी हासिल करने में थोड़ा समय लगेगा. मुमकिन है कि बर्मा की सरकार ने हमें अपनी सीमा से खदेड़ने के लिए यह हमला किया हो. अगर हमने उनका क्षेत्र खाली न किया तो शायद इससे बड़े और घातक हमले भी किए जाएं.''
एनएससीएन 1981 में अस्तित्व में आया था. इस संगठन का मकसद था 1956 में भारत के खिलाफ़ छेड़े गए विद्रोह को हथियारबंद संघर्ष से जोड़ना.
यह संगठन 1988 में दो धड़ों में बँट गया था. बर्मा के नगा नेता एसएस खपलांग के समर्थकों ने टी मुइवाह और इसाक चीसी के नेतृत्व वाले मुख्य धड़े से अलग होकर नया गुट बना लिया था.
एक धड़ा जहां भारत सरकार से बातचीत और कर रहा है वहीं बर्मा के नगा नेता एसएस खपलांग के नेतृत्व वाले धड़े ने भारतीय सुरक्षाबलों के साथ युद्धविराम की घोषणा कर दी है.
हालांकि पिछले दो साल के दौरान कई बार बर्मा स्थित उसके ठिकानों पर सेना की ओर से हमले किए जा चुके हैं.
भूटान ने भी दिसंबर 2003 में अपनी सीमा में मौजूद इन विद्रोहियों के ठिकानों पर सैन्य हमले किए थे. इस दौरान कई कैंप ध्वस्त कर दिए गए थे, कई विद्रोही मारे गए थे और कई पकड़े भी गए थे.
बांग्लादेश ने भी 2009 से अपने इलाके में स्थित विद्रोहियों के ठिकानों के खिलाफ़ अभियान छेड़ रखा है. अबतक बांग्लादेश की ओर से इन संगठनों के 70 से ज़्यादा शीर्ष नेताओं को गिरफ़्तार कर भारत के हवाले किया जा चुका है.
ग़ौरतलब है कि बर्मा की अपनी यात्रा के दौरान भारत के गृह सचिव जीके पिल्लई ने बर्मा से अपील की थी कि वो अपनी सीमा में मौजूद इन विद्रोहियों के ठिकानों पर कार्रवाई करें.
पूर्व विदेश सचिव कृष्णनन श्रीनिवासन के मुताबिक, ''भारत, क्षेत्रिय कूटनीति के तहत पूर्वोत्तर के हिंसाग्रस्त इलाकों में घुसपैठ रोकने के लिए दबाव बनाने और इस समस्या से निपटने की कोशिश कर रहा है.''












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