रेल बजट : मप्र के लोगों को ज्यादा कुछ न मिलने का मलाल (लीड-1)
रेल बजट में वरिष्ठ नागरिक को यात्रा टिकट पर मिलने वाली रियायत में 10 प्रतिशत की बढ़ोतरी की गई है। वरिष्ठ नागरिक की श्रेणी में उन महिलाओं को भी रखा गया है जो 58 वर्ष या उससे अधिक उम्र की हैं।
वहीं मध्य प्रदेश को तीन नई रेल गाड़ियां मिली हैं तथा तीन नई रेल लाइनों को बजट में मंजूरी मिली है। इसके अलावा कई अन्य रेलगाड़ियां भी मध्य प्रदेश से होकर गुजरेंगी।
रेल बजट पर विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े लोगों ने प्रतिक्रिया जताई है। पीएचडी चैम्बर ऑफ कॉर्मस के अध्यक्ष राजेंद्र कोठारी का कहना है कि रेल बजट ने आम लोगों की जेब पर बोझ नहीं डाला है, इसलिए यह स्वागत योग्य है। उन्होंने कहा कि इस रेल बजट से मध्य प्रदेश को ज्यादा उम्मीदें थीं, मगर ऐसा नहीं हुआ। अन्य प्रदेशों की तुलना में इस प्रदेश को वह नहीं मिला है, जिसका वह हकदार है।
सामाजिक कार्यकर्ता प्रशांत दुबे का कहना है कि महंगाई के दौर में रेल यात्रा का महंगा न होना सुखद है, मगर मध्य प्रदेश को ज्यादा कुछ हासिल न होने का अफसोस है। यहां कई इलाकों की रेल लाइनें ऐसी हैं, जिन पर एक या दो रेलगाड़ियां ही चलती हैं, लिहाजा रेलगाड़ियों की संख्या और बढ़ाई जानी चाहिए थी।
सेवानिवृत्त अधिकारी आर.एस. शर्मा कहते हैं कि रेल बजट ने बुजुर्गो को राहत दी है। यह एक सार्थक कदम है। उनका मानना है कि अगर रेलगाड़ियों में महिलाओं व विकलांगों की तरह बुजुर्गो के लिए भी डिब्बे आरक्षित किए जाते तो ज्यादा अच्छा होता।
गृहणी चंदा देवी कहती हैं कि रेल किराये में बढ़ोतरी न होने से समाज का हर वर्ग राहत महसूस कर रहा है, वहीं महिलाओं को 60 वर्ष के स्थान पर 58 वर्ष में ही वरिष्ठ नागरिक की सुविधा का फैसला लिया गया है, जो सुखद है।
कारोबारी लक्ष्मी नारायण रेल बजट को सुखद करार देते हैं। उनका कहना है कि बढ़ती महंगाई के बीच किराये में इजाफा न किया जाना काफी राहत देने वाला है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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