तो भोपाल का नाम भोजपाल हो जाएगा !

राजा भोज के राज्यारोहण के एक हजार साल पूरा होने के उपलक्ष्य में 28 फरवरी को भोपाल में विशेष समारोह किए जाने के साथ बड़ी झील पर स्थापित की गई प्रतिमा का भी अनावरण किया जाना प्रस्तावित है। राज्यारोहण के 1000 वर्ष पूरे होने पर भाजपा ने भोपाल का नाम भोजपाल किए जाने की मांग जोर शोर से शुरू कर दी है।

सत्तारुढ़ दल के विधायक विश्वास सारंग ने सोमवार को प्रदेश सरकार से मांग की है कि भोपाल का नाम भोजपाल होना चाहिए। सारंग का तर्क है कि भोजपाल का बिगड़ा नाम (अपभ्रंश) भोपाल है, लिहाजा उसका मूल नाम भोजपाल ही होना चाहिए। वे दुनिया और देश में सांस्कृतिक पृष्ठभूमि के चलते नगरों के नाम बदले जाने का हवाला देते है।

नगरीय प्रशासन मंत्री बाबू लाल गौर भी भोपाल का नाम भोजपाल किए जाने के पक्षधर हैं। उनका कहना है कि भोजपुर का मंदिर व भोज ताल इस बात का उदाहरण है, कि भोपाल का नाम भोजपाल था। लिहाजा पूर्ववत नाम को स्वीकार किया जाना चाहिए।

वहीं कांग्रेस ने भाजपा की मांग का विरोध किया है। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष राकेश चौधरी का कहना है कि यह कोशिश दक्षिणपंथी और फासिस्टवादी विचारधारा का परिचायक है। इन लोगों का काम ही पुराने प्रतीकों को मिटाकर नए प्रतीक स्थापित करना है।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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