उड़ीसा में मध्यस्थों के साथ दूसरे दौर की बातचीत शुरू (लीड-2)
भुवनेश्वर, 21 फरवरी (आईएएनएस)। नक्सलियों द्वारा अगवा किए गए जिलाधिकारी और जूनियर इंजीनियर की सकुशल रिहाई के प्रयासों को तेज करते हुए राज्य सरकार ने नक्सलियों द्वारा नियुक्त किए गए मध्यस्थों के साथ सोमवार को दूसरे दौर की बातचीत शुरू दी है।
राज्य के गृह सचिव यू. एन. बेहरा और पंचायती राज सचिव एस. एन. त्रिपाठी ने तीनों मध्यस्थों जी. हरगोपाल, आर. सोमेश्वर राव और दंडपाणि मोहंती के साथ सोमवार को दूसरे दौर की बातचीत शुरू कर दी है।
राज्य के वरिष्ठ अधिकारियों और मध्यस्थों के बीच रविवार को पहले दौर की बातचीत शुरू हुई थी लेकिन कई घंटो की बातचीत के बावजूद कोई निष्कर्ष नहीं निकल पाया।
सरकार से बातचीत कर रहे तीन मध्यस्थों में से एक जी. हरगोपाल ने सोमवार को कहा कि नक्सलियों के एक नेता गांति प्रसादम को अभी तक जेल से छोड़ा नहीं गया है इसलिए बंधक प्रकरण हल होने में समय लग सकता है। उन्होंने कहा, "बातचीत कुछ और समय तक जारी रह सकती है।"
सोमवार को नक्सलियों के साथ दूसरे दौर की बातचीत शुरू होने से कुछ घंटे पहले हरगोपाल ने स्थानीय टेलीविजन चैनल से कहा, "गांति प्रसाद को छोड़े जाने के बाद बातचीत की प्रक्रिया तेज हो जाएगी।"
सूत्रों के मुताबिक राज्य पुलिस ने अदालत से जेल स्थानांतरण वारंट हासिल कर प्रसादम को शनिवार रात आंध्र प्रदेश की एक जेल से लेकर प्रदेश लौटी।
सूत्रों के मुताबिक एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि प्रसादम के वकील सोमवार को कोरापुट की अदालत में जमानत याचिका दायर कर सकते हैं।
अधिकारी ने बताया कि बातचीत की प्रक्रिया को सुविधाजनक बनाने के लिए सरकारी वकील इस जमानत याचिका का विरोध नहीं करेंगे।
एक विशेषज्ञ के मुताबिक हालांकि यह पूरी तरह से अदालत पर निर्भर करेगा कि वह जमानत देना चाहती है अथवा नहीं।
जिलाधिकारी की रिहाई को लेकर राज्य के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ हुई बातचीत के बारे में हरगोपाल ने कहा कि बातचीत सौहार्दपूर्ण माहौल में हुई।
उन्होंने कहा, "रविवार को सरकार के प्रतिनिधियों और मध्यस्थों के बीच सभी मांगो पर विचार विमर्श किया गया। अधिकांश मांगो को लेकर सरकार की प्रतिक्रिया अच्छी थी।"
जिलाधिकारी आर. विनील कृष्णा की रिहाई को लेकर नक्सलियों ने सरकार को मांगों की एक सूची सौपीं है।
नक्सलियों ने सरकार से नक्सल-विरोधी अभियान रोकने, एक शीर्ष नेता की रिहाई, बहुराष्ट्रीय कम्पनियों के साथ हुए समझौतों को रद्द करने तथा पुलिस हिरासत में मारे गए नक्सली समर्थकों के परिवारों को मुआवजा देने की मांग की है।
उल्लेखनीय है कि मलकानगिरी जिले के जिलाधिकारी कृष्णा और एक जूनियर इंजीनियर पबित्र मोहन माझी को नक्सलियों ने 16 फरवरी को अगवा कर लिया था।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
*












Click it and Unblock the Notifications