आरुषि हत्याकांड : 28 फरवरी तक नूपुर तलवार नहीं होगी गिरफ्तार
अब सवाल ये उठता है कि इस केस में आरोपियों का अगला कदम क्या होगा? जब से ये फैसला आया है तब से मीडिया जगत में सिर्फ और सिर्फ ये बात दिखायी जा रही है कि सीबीआई कभी भी नूपुर तलवार की गिरफ्तारी कर सकती है। जिससे केवल कन्फ्यूजन पैदा हो रहा है, हमारी टीम ने इस विषय पर हमने वारिष्ठ कानून विशेषज्ञों से बात की तो पता चला कि ये फैसला कैसे और क्यों सुनाया गया है। और इस केस अब आगे क्या हो सकता है?
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जहां तक कानून के नियम का सवाल है तो उस के मुताबिक जब कोई केस मजिस्ट्रेट के सामने पेश होता है और उस पर जो रिपोर्ट पेश की जा सकती है उस के मुताबिक मजिस्ट्रेट के पास तीन विकल्प होते है, पहला ये कि वो याची की बात मान ले, दूसरा या तो वो याची की बात रिजेक्ट कर दें और तीसरा ये की वो याची की बात पर सम्मन जारी कर दें।
तो मजिस्ट्रेट ने याची की बात मानते हुए आरोपियों को सम्मन जारी कर दिया है। चूंकि केस सीबीआई के पास था और सीबीआई कह चुकी थी सबूतों के अभाव में केस बंद कर दें, उसने आरूषि के माता-पिता पर सबूत मिटाने का आरोप लगाया था जिसके मुताबिक सीबीआई कोर्ट ने आऱूषि के माता-पिता को आरोपी बनाते हुए दोनों को सम्मन जारी कर दिया और मामले की दोबारा जांच कराने का आदेश दिया है।
चूंकि मामला सीबीआई के हाथ से निकल कर कोर्ट पहुंच चुका है इसलिए अब कोर्ट जो कहेगा वा कार्रवाई होगी। इसलिए सीबीआई अब नूपुर को गिरफ्तार नहीं कर सकती है और सम्मन के आधार पर राजेश-नूपुर को 28 तारीख को कोर्ट में पेश होना होगा। हां अब आरोपीगण इस कोर्ट के खिलाफ अपनी गुहार हाईकोर्ट में लगा सकते हैं।













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