आरुषि हत्‍याकांड: 4 नए गवाहों ने किए अहम खुलासे

Aarushi Talwar
नई दिल्‍ली। आरुषि तलवार और उसके नौकर हेमराज की हत्‍या बड़ी गुत्‍थी बनकर केंद्रीय जांच ब्‍यूरो (सीबीआई) के सामने आया। सीबीआई ने जांच की, गवाहों के बयान लिए, लेकिन तह तक नहीं पहुंच सकी। खास बात यह है कि सीबीआई की ही क्‍लोज़र रिपोर्ट में अब चार नए गवाहों का खुलासा हुआ है, जिनके बयानों के आधार पर हत्‍या का शक माता-पिता नुपुर और राजेश तलवार पर गहराता है।

आप सोच रहे होंगे कि इतने दिनों से ये गवाह कहां थे, हम आपको पहले ही बता दें, कि गवाहों के बयान हत्‍या के कुछ ही दिन बाद लिए गए, लेकिन रिपोर्ट का खुलासा सीबीआई ने नहीं किया। चूंकि अब यह रिपोर्ट सीबीआई ने कोर्ट में पेश कर दी है, लिहाजा उसकी कॉपर सार्वजनिक कर दी गई है। इस रिपोर्ट में चार नए गवाहों के नाम आए हैं- पेंटर शौहरत, डा. तलवार के दोस्‍त डा. रोहित कोचर व राजीव वार्ष्‍णेय और संजय चौहान।

चलिए देखते हैं इन चारों गवाहों ने सीबीआई को क्‍या बयान दिए, जिनके आधार पर राजेश, नुपुर को कठघरे में खड़ा कर दिया गया है।

पहला गवाह है पेंटर शौहरत है, जिससे कत्‍ल के कुछ दिन बाद नुपुर तलवार ने आरुषि व अपने कमरे के बीच की लकड़ी की दीवार को पेंट करवाया। शौहरत को इस काम के लिए 25 हजार रुपए दिए गए। शौहरत के बयान से साफ जाहिर होता है, कि इस तरह सबूत मिटाने के प्रयास किए गए।

दूसरे गवाह रोहित कोचर हैं, जिन्‍होंने सीबीआई को बयान दिया कि कत्‍ल के बाद की सुबह साढ़े आठ बजे वे तलवार के घर गए थे, वहां खून के धब्‍बे दिखे थे, छत पर जाती सीढि़यों पर खून के धब्‍बे भी देखे थे। कोचर ने यह बयान मजिस्‍ट्रेट के सामने दिया। उन्‍होंने बताया कि छत के दरवाजे के हैंडल पर भी खून के निशान थे। सीढि़यों पर ऐसा लग रहा था कि किसी ने खून के निशान पोछे हों।

उस दौरान कोचर के साथ राजीव वार्ष्‍णेय भी थे। उन्‍होंने भी यही बयान दिया जो कोचर ने। वार्ष्‍णेय ने आगे कहा कि सुबह जब हमने राजेश तलवार से छत पर जाने के लिए चावी मांगी तो वो बिना कुछ बोले ही अंदर चले गए।

चौथा और सबसे अहम गवाह है संजय चौहान। संजय ने सीबीआई को बयान दिया, "मैं 16 मई 2008 को सुबह साढ़े सात बजे तलवार के घर पहुंचा। मैने देखा आरुषि की पैंट कमर से थोड़ी नीची थी। उसके माता-पिता उसे एक कमरे से दूसरे में ले जा रहे थे और उनके चहरे पर जरा भी शिकन नहीं दिख रही थी। वो पूरे समय वे आरुषि की लाश से दूर-दूर दिख रहे थे। पुलिस ने जब छत के दरवाजे पर खून के निशान देखे तो उसे खोलना चाहती थी, लेकिन चावी नहीं दी गई। मैंने सीढि़यों पर ऐसे निशान देखे थे, जिनसे साफ जाहिर हो रहा था कि किसी को मारकर उसे घसीट कर छत पर ले गए हों। उस दौरान राजेश और नुपुर पुलिस से बाहर बार कह रहे थे- आप समय क्‍यों नष्‍ट कर रहे हैं, कोई हेमराज का पता लगाने की कोशिश क्‍यों नहीं करता?"

इसके अलावा सीबीआई की रिपोर्ट में लिखा है कि आरुषि और हेमराज दोनों पर पहली चोट गोल्‍फ स्टिक नंबर पांच से पहला वार हुआ और इसे अदालत ने माना है और अपनी मुहर लगाई। हत्‍या से कुछ दिन पहले से ये गोल्‍फ स्टिक हमराज के कमरे में रखी गई थी। रिपोर्ट में उल्‍लेख किया गया है कि दोनों हत्‍याएं गोल्‍फ स्टिक नंबर पांच से हुई हैं। चोटों के निशान 8x3 के आकार का है, जबकि स्टिक का आकार भी 8X3 का है।

21 पेज के ऑर्डर में अदालत ने कहा कि जाहिर है बाहरी व्‍यक्ति गोल्‍फ स्टिक खरीद कर हत्‍या करने नहीं आएगा। इसी को कोर्ट ने चार्जशीट मान लिया है। इन चारों गवाहों के बयानों से आरुषि मर्डर केस को एक बार फिर से जिंदा कर दिया है, लेकिन अब अगर इसमें लापरवाही बरती गई, तो यह हमेशा के लिए अनसुलझा रह जाएगा।

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