SIT ने गोधरा मामले में मोदी को क्लीन चीट क्यों दी?
उस खबर के मुताबिक साल 2002 के सांप्रदायिक दंगों में मोदी का हाथ नहीं था। जिसके बाद पूरे भाजपा में खुशी की लहर दौड़ गई थी और उसने विरधियों को जबरदस्ती मोदी का नाम बदनाम करने के लिए कोसना शुरू कर दिया था।
लेकिन शुक्रवार को ये मुद्दा एक बार फिर से जिंदा हो गया है। तहलका में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) मोदी के खिलाफ कोई सबूत जुटा नहीं पायी है इसलिए उसने मोदी को पाक-साफ बताया है।
खबर की मानें तो एसआईटी का कहना है कि गुजरात सरकार ने दंगों के सबूत मिटाने की कोशिश की है। रिपोर्ट के मुताबिक नरेन्द्र मोदी के उस बयान की चर्चा है जिस में उन्होंने कहा कि न्यूटन लॉ के मुताबिक हर क्रिया की प्रतिक्रिया होती है।
जिसके कारण मोदी पर भड़काऊ भाषण देने का आरोप लगा है। मोदी के लिए ये भी कहा गया है उन्होंने दंगा स्थल को दौरो की जांच में भी भेद-भाव बरता है। आपको बता दें सुप्रीम कोर्ट ने पिछले साल 27 अप्रेल को सीबीआई के पूर्व निदेशक आरके राघवन की अध्यक्षता में एसआईटी का गठन किया था। एसआईटी को गुजरात दंगों के दौरान मारे गए कांग्रेसी सांसद एहसान जाफरी की पत्नी जकिया जाफरी की शिकायत की जांच करने को कहा था।
वहीं अब से थोड़ी देर पहले भाजपा ने भड़कते हुए प्रतिक्रिया दी है और सरकार की कानून व्यवस्था पर प्रश्न उठाया है कि इतने संवेदनशील मुंद्दे
की रिपोर्ट सार्वजनिक कैसे हो गई? ये बीजेपी और मोदी को बदनाम करने की साजिश है।
अब आप ही बताइये कौन सच्चा है कौन झूठा? अगर एसआईटी की टीम सच्ची है तो तहलका के पास उसकी वो कॉपी कहां से आ गई जो उसने छापी है, और एसआईटी का सच उजागर किया है, आखिर कोई भी मीडिया तंत्र बिना सबूतों के अफवाह क्यों फैलायेगा, इससे उसको क्या मिलेगा। प्रश्न ये ही है कि एसआईटी की इस रिपोर्ट के बाद ये क्यों कहां जाने लगा कि नरेन्द्र मोदी पाक साफ है। जबकि ये जानने की कोशिश क्यों नहीं की गई की 600 पन्ने की रिपोर्ट में कहा क्या गया है?
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