शांति वार्ता के लिए उल्फा ने की गुप्त बैठक

उल्फा अध्यक्ष अरविंद राजखोवा ने पत्रकारों को बताया, "हमने पहले अपनी केंद्रीय कार्यकारिणी की बैठक पूरी की और उसके बाद वहां पारित प्रस्तावों को महापरिषद में स्वीकृति दे दी गई। दोनों बैठकों के विवरण शनिवार को संवाददाता सम्मेलन में सार्वजनिक कर दिए जाएंगे।"

राजखोवा, फिलहाल जमानत पर जेल से बाहर हैं। राजखोवा ने गुवाहाटी में एक अदालती सुनवाई में हिस्सा लेने के बाद कहा, "मैं शनिवार से पहले बैठक के विवरणों का खुलासा नहीं कर सकता।"

लेकिन उल्फा सूत्रों ने आईएएनएस को बताया कि प्रतिबंधित संगठन की केंद्रीय कार्यकारिणी और महापरिषद की बैठकें पिछले सप्ताह पश्चिमी नलबारी जिले में हुई थीं। दोनों बैठकें गुप्त रूप से हुई थीं और मीडिया को पूरी तरह दूर रखा गया था।

उल्फा के प्रचार प्रमुख मिथिंगा दायमरी ने कहा, "बैठक में उल्फा के कमांडरों ने भी हिस्सा लिया था।"

बैठक में राजखोवा के अलावा जिन लोगों ने हिस्सा लिया था, उनमें उपाध्यक्ष प्रदीप गोगोई, उप कमांडर-इन-चीफ राजू बरुआ, स्वयंभू विदेश सचिव सशा चौधरी, वित्त सचिव चित्रबन हजारिका, सांस्कृतिक सचिव प्रणति डेका और उल्फा के वयोवृद्ध विचारक भीमकांता बरगोहैन शामिल हैं।

उल्फा के सभी शीर्ष आठ नेता फिलहाल जमानत पर जेल से बाहर है, क्योंकि शांति वार्ता का मार्ग प्रशस्त करने के लिए सरकार ने उनकी रिहाई सुनिश्चित कराई थी।

उल्फा के वरिष्ठ नेताओं के अनुसार बैठक में लिए गए महत्वपूर्ण निर्णयों में सरकार के साथ बिना शर्त बातचीत करने के अलावा नई दिल्ली से इस बात के लिए आग्रह करना शामिल है कि वह बांग्लादेश की एक जेल में 1997 से कैद उल्फा महासचिव, अनूप चेतिया को भारत लाने में मदद करे।

उल्फा का कमांडर-इन-चीफ परेश बरुआ सम्भवत: चीन-म्यांमार की सीमा पर कहीं छुपा हुआ है और शांति वार्ता के बारे में उसका रुख अभी तक अस्पष्ट है।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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