बाल यौन अपराध विधेयक पर भाजपा महिला मोर्चा को आपत्ति
नई दिल्ली, 1 फरवरी (आईएएनएस)। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की महिला मोर्चा ने बाल अधिकार संरक्षण राष्ट्रीय आयोग द्वारा प्रस्तावित विधेयक यौन अपराध से बच्चों की सुरक्षा 2010 के सम्बंध में समाचार पत्रों में प्रकाशित रिपोर्टों की कड़ी निंदा की है। इसके साथ ही मोर्चा ने आयोग का नाम बदलकर इसे बच्चों के यौन शोषण के लिए राष्ट्रीय आयोग करने का प्रस्ताव आयोग को दिया है।
महिला मोर्चा की उपाध्यक्ष मीनाक्षी लेखी ने एक बयान में बताया कि स्वायत्तता की अवधारणा जिम्मेदारी के साथ आती है। जिम्मेदारी की भावना परिपक्वता से उत्पन्न होती है और परिपक्वता उम्र के साथ आती है। प्रस्तावित विधेयक में सहमति की उम्र 16 से 18 वर्ष रखी गई है।
उन्होंने कहा कि बच्चों के अधिकार सुरक्षा पर संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन, भारतीय दंड संहिता, किशोर न्याय कानून और भारतीय संविधान में दी गई सहमति की उम्र की समीक्षा किए बगैर इसे लागू करना निंदनीय है।
लेखी ने कहा कि सहमति की उम्र का अधिकार उचित समय से पहले देना स्वतंत्रता नहीं बल्कि उसे कानूनी मान्यता प्रदान करना है।
उन्होंने कहा कि संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) सरकार द्वारा प्रस्तावित नीति की महिला मोर्चा निंदा करता है। यह नीति वैध सिद्धांतों से वंचित करने वाली है और इसे देश की सामाजिक आर्थिक वास्तविक्ताओं को ध्यान में रखकर नहीं तैयार किया गया है।
लेखी ने कहा कि प्रस्तावित विधेयक का नाम भी अनुपयुक्त है और इससे बच्चों के यौन उत्पीड़न की आशंका आगे भी बनी हुई है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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