याचिका के फैसले पर निर्भर करेगी 2जी आवंटन पर सरकारी कार्रवाई (लीड-1)

न्यायालय ने मंगलवार को कहा कि सरकार 2जी स्पेक्ट्रम लाइसेंस की शर्तें पूरी करने में असफल कम्पनियों के लाइसेंस नियमित करने से सम्बंधित जो भी फैसला लेगी, उसमें वर्ष 2008 में 2001 की कीमतों पर किए गए स्पेक्ट्रम आवंटन को चुनौती देने वाली याचिका पर आने वाले फैसले का पालन करना होगा।

न्यायामूर्ति जी. एस. सिंघवी और न्यायमूर्ति अशोक कुमार गांगुली की खंडपीठ ने कहा, "हम नहीं जानते कि उन्होंने (केंद्र सरकार) कोई कार्रवाई की है या नहीं, लेकिन वह जो कुछ भी करेंगे उसमें याचिका के अंतिम निर्णय का पालन किया जाएगा।"

गैर सरकारी संस्था 'सेंटर फॉर पब्लिक इंटरेस्ट लिटिगेशन' की ओर से वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण ने एक अंतरिम आदेश की मांग की जिस पर न्यायालय ने यह टिप्पणी की। भूषण ने केंद्रीय दूरसंचार मंत्रालय द्वारा शर्ते पूरी नहीं करने वालीं कम्पनियों पर जुर्माना लगाकर उन्हें छूट देने पर रोक लगाने के लिए अंतरिम आदेश जारी करने की मांग की।

वरिष्ठ वकील ने अदालत से मांग की कि वह सरकार को निर्देश दे कि भविष्य में ऊर्जा, खान, खनिज, भूमि या स्पेक्ट्रम जैसे किसी भी संसाधन का पारदर्शी और प्रतिस्पद्र्धी तरीके से ही नीलामी की जाए।

भूषण के यह कहने पर कि दूरसंचार मंत्री जुर्माना लगाकर दोषी कम्पनियों को छूट दे देगी, अदालत ने कहा कि वह अदालत में मान्य नहीं होगा।

न्यायालय ने केंद्र सरकार और दूरसंचार कम्पनियों को तीन सप्ताह में जवाब सहित अदालत में पेश होने को कहा है। मामले की अगली सुनवाई 1 मार्च को निर्धारित की गई है।

न्यायालय ने यह निर्देश वर्ष 2008 में 2001 की कीमतों पर 2जी लाइसेंस प्राप्त करने वाली सभी दूरसंचार कम्पनियों के लाइसेंस रद्द करने की मांग करने वाली याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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