करमापा मामले में रिकार्ड खंगाल रहा है प्रवर्तन निदेशालय (लीड-1)

प्रवर्तन निदेशालय अधिकारियों ने करमापा से पूछताछ की या नहीं यह पता नहीं चला है। चण्डीगढ़ से गए चार सदस्यीय दल की अध्यक्षता उपनिदेशक वी. नीरजा कर रहे थे।

एक अधिकारी ने आईएएनएस से कहा कि जांच दल ने वित्तीय लेन-देन से सम्बंधित दस्तावेज देखे। उन्होंने मठ के अधिकारियों से दान और अन्य लेन देन से सम्बंधित खाता-बही के बारे में भी पूछताछ की।

एक जांच अधिकारी ने आईएएनएस से कहा कि वे यह जांच कर रहे हैं कि ये मुद्रा कहां से आईं, यह किस उद्देश्य से रखी गई थी, ये बेनामी क्यों थी और सरकार को विदेशी मुद्रा के बारे में क्यों नहीं बताया गया।

संवाददाताओं द्वारा यह पूछने पर कि क्या ईडी दल जांच से संतुष्ट है, नीरजा ने सिर्फ कहा, 'हां'।

करमापा, उग्येन त्रिनले दोरजी से हिमाचल प्रदेश पुलिस के एक दल ने पहले भी पूछताछ की है। इसके अलावा 28 जनवरी को भी उनके पास से बरामद हुई मुद्रा के बारे में पूछताछ की जा चुकी है।

रविवार को उनसे पूछताछ के बाद उनके प्रवक्ता ने उन पर लगे आरोपों का खंडन करते हुए कहा था कि वे चीनी जासूस नहीं हैं।

प्रवक्ता कर्मा तोपदेन ने संवाददाताओं से कहा था कि उन्होंने भारत सरकार के विरुद्ध कुछ भी नहीं किया है।

उन्होंने कहा कि करमापा को यह राशि दुनिया भर से दान में मिली है। इसका सम्बंध हवाला से नहीं है।

जांच अधिकारी करमापा के पास से बरामद मुद्रा के बारे में पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं। सरकार को सबसे अधिक परेशानी 70 लाख रुपये मूल्य की चीनी मुद्रा युआन और छह लाख अमेरिकी डॉलर से है।

चीनी मुद्रा के कारण करमापा का चीन से सम्बंध होने का संदेह जताया जा रहा है। करमापा जनवरी, 2000 में तिब्बत के ल्हासा के एक मठ से रहस्यमय परिस्थितियों में यहां आए थे।

पुलिस अधिकारियों ने कहा कि चीनी नोटों की जिस प्रकार की गड्डियां बनी हुई हैं, उसे देखते हुए यह नहीं लगता कि यह दान में मिली है।

करमापा और उनके सहयोगियों को विदेशी मुद्रा रखने के इस मामले में फॉरेन एक्सचेंज मेंटनेंस एक्ट (फेमा) का सामना करना पड़ सकता है।

हिमाचल प्रदेश के पुलिस महानिदेशक डी. एस. मन्हास ने कहा कि करमापा के पास 25 देशों की मुद्रा थीं।

पुलिस का मानना है कि यह धन कांगड़ा जिले के धर्मशाला में एक अवैध भूमि सौदे के लिए रखा गया था। जिसमें करमापा के सहयोगी रुब्गी चोसंग मदद कर रहे थे। उन्हें शक्ति लामा के नाम से भी जाना जाता है। वे अभी पुलिस हिरासत में हैं।

इस मामले में अब तक पांच लोगों को हिरासत में लिया गया है।

करमापा के वकील नरेश माथुर ने कहा कि केंद्र सरकार को पहले से मठ को दान में मिली राशि की सूचना दी गई थी। इसमें विदेश से मिले दान का भी जिक्र किया गया था।

उन्होंने कहा कि 2003 से मठ का प्रशासनिक विभाग केंद्र सरकार से दान में मिली विदेशी मुद्रा के प्रबंधन की अनुमति मांग रहा था। सरकार ने इस दलील को यह कहकर खारिज कर दिया है कि इस तरह का कोई प्रावधान नहीं है।

करमापा बौद्ध धर्म की चार धाराओं में से एक करमा काग्यू स्कूल के आध्यात्मिक गुरु हैं। उन्हें दलाई लामा और पंचेन लामा के बाद तीसरा सबसे प्रमुख तिब्बती धर्मगुरु माना जाता है।

करमापा ने 2000 में तिब्बत से भाग कर भारत में शरण ली थी। उसके बाद वे अधिकतर समय धर्मशाला के सिद्धाबरी मठ में ही रह रहे हैं।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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