शराब से होगा हृदय रोगी का इलाज
हृदय के कुछ रोगों में हृदय की मांसपेशी मोटी हो जाती है और इससे रक्त प्रवाह में बाधा पैदा हो जाती है। इसे चिकित्सा शब्दावली में हाइपरट्रोफिक कार्डियोमायोपैथी (एचसीएम) कहा जाता है। इसके कारण श्वास लेने में कठिनाई, हृदयाघात जैसी प्राणघातक समस्या पैदा होती है।
मेदांता मेडिसिटी के इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजी के अध्यक्ष प्रवीण चंद्रा ने आईएएनएस से कहा कि इस रोग में हृदय के उस हिस्से में जहां मांसपेशी अधिक मोटी हो गई हो, शुद्ध शराब का इस्तेमाल कर थोड़ा गला दिया जाता है, जिससे रक्त का प्रवाह सही हो जाता है।
इलाज का यह तरीका हालांकि दशक भर पुराना है लेकिन अब इसका प्रचलन बढ़ रहा है। क्योंकि यह कम खर्चीली पद्धति है और रोगी जल्दी स्वस्थ्य हो जाता है।
फोर्टिस एस्कॉर्ट्स हार्ट इंस्टीट्यूट के इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजी के निदेशक अतुल माथुर ने कहा कि इस रोग का पुराना तरीका इसकी तुलना में अधिक जटिल था।
शराब का उपयोग कर रोग का इलाज करने में अब पारम्परिक पद्धति की तुलना में आधा करीब एक लाख रुपये का खर्च आता है।
रोग के इलाज में शराब का उपयोग नई बात नहीं है। लीवर के कैंसर में खराब कोशिकाओं को जलाने में शराब का उपयोग होता रहा है, हालांकि अब इससे बेहतर तकीनीक आ गई है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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