भाजपा ने आईसीसी से की ईडन पर पुनर्विचार की अपील
हुसैन ने कहा, "ईडन गार्डन्स में विश्व कप नहीं होना, कोलकाता के साथ-साथ समूचे पूर्वी भारत के लिए शर्मनाक बात है। आईसीसी और बीसीसीआई को इस मामले में ध्यान देना चाहिए और पूरे क्षेत्र के लोगों की भावनाओं को ध्यान में रखकर अपने फैसले पर पुनर्विचार करना चाहिए।"
आईसीसी ने बीते गुरुवार को ईडन से भारत-इंग्लैंड मैच की मेजबानी छीनने की घोषणा की थी। टूर्नामेंट निदेशक, केंद्रीय आयोजन समिति और आईसीसी के सदस्यों से बने निरीक्षण दल ने ईडन का मुआयना करने के बाद पाया था कि निर्माण कार्य समय रहते पूरा नहीं हो पाने के कारण स्टेडियम फिलहाल मैच की मेजबानी की स्थिति में नहीं है।
इस दल ने श्रीलंका के कोलम्बो, हम्बानटोटा और पालेकेले स्थित तीन मैदानों को आयोजन के अनुरूप करार दिया था। दल ने कहा था कि फाइनल मुकाबले का मेजबान वानखेड़े स्टेडियम और श्रीलंका के तीन स्टेडियम 14 दिनों के भीतर पूरी तरह तैयार हो जाएंगे लेकिन ईडन गार्डन्स की तैयारी समय पर पूरी नहीं हो सकती।
इस सम्बंध में बंगाल क्रिकेट संघ (सीएबी) के अनुरोध पर बीसीसीआई ने आईसीसी के सामने अपने फैसले पर पुनर्विचार की अपील की थी लेकिन शनिवार को उसे भी ठुकरा दिया गया था। इसके बाद ही आईसीसी ने बीसीसीआई से ईडन के विकल्प का नाम सुझाने को कहा था। बीसीसीआई ने बेंगलुरू का नाम सुझाया था, जिसे आईसीसी ने सोमवार को स्वीकार कर लिया था।
राजग सरकार में खेल मंत्री रह चुके हुसैन ने कहा, "पूरे पूर्वी भारत को भारत-इंग्लैंड मैच का इंतजार है। अगर यह मैच ईडन में नहीं होगा तो यहां के लोग कहां जाएंगे। क्या उन्हें बेंगलुरू जाकर यह मैच देखना पड़ेगा?"
यह पूछे जाने पर कि क्या इस पूरे मामले की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए सीएबी अध्यक्ष जगमोहन डालमिया को इस्तीफा दे देना चाहिए? हुसैन ने कहा कि जो भी इसके लिए जिम्मेदार है, उसे अपना पद छोड़ देना चाहिए।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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