करमापा मामले में प्रवर्तन निदेशालय की जांच शुरू

एक जांच अधिकारी ने आईएएनएस से कहा कि वे यह जांच कर रहे हैं कि ये मुद्रा कहां से आईं, यह किस उद्देश्य से रखी गई थी, ये बेनामी क्यों थी और सरकार को विदेशी मुद्रा के बारे में क्यों नहीं बताया गया।

उन्होंने कहा कि अधिकारी करमापा से भी पूछताछ कर सकते हैं।

करमापा, उग्येन त्रिनले दोरजी से हिमाचल प्रदेश पुलिस के एक दल ने पहले भी पूछताछ की है। इसके अलावा 28 जनवरी को भी उनके पास से बरामद हुई मुद्रा के बारे में पूछताछ की जा चुकी है।

उनसे पूछताछ के बाद उनके प्रवक्ता ने उन पर लगे आरोपों का खंडन करते हुए कहा था कि वे चीनी जासूस नहीं हैं।

प्रवक्ता कर्मा तोपदेन ने संवाददाताओं से कहा था कि उन्होंने भारत सरकार के विरुद्ध कुछ भी नहीं किया है।

उन्होंने कहा कि करमापा को यह राशि दुनिया भर से दान में मिली है। इसका सम्बंध हवाला से नहीं है।

जांच अधिकारी करमापा के पास से बरामद मुद्रा के बारे में पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं। सरकार को सबसे अधिक परेशानी 70 लाख रुपये मूल्य की चीनी मुद्रा युआन और छह लाख अमेरिकी डॉलर से है।

चीनी मुद्रा के कारण करमापा का चीन से सम्बंध होने का संदेह जताया जा रहा है। करमापा जनवरी, 2000 में तिब्बत के ल्हासा के एक मठ से रहस्यमय परिस्थितियों में यहां आए थे।

पुलिस अधिकारियों ने कहा कि चीनी नोटों की जिस प्रकार की गड्डियां बनी हुई हैं, उसे देखते हुए यह नहीं लगता कि यह दान में मिली है।

करमापा को विदेशी मुद्रा रखने के इस मामले में फॉरेन एक्सचेंज मेंटनेंस एक्ट (फेमा) का सामना करना पड़ सकता है।

हिमाचल प्रदेश के पुलिस महानिदेशक डी. एस. मन्हास ने कहा कि करमापा के पास 25 देशों की मुद्रा थीं।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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