पूर्वोत्तर में हिंसा निम्नतम स्तर पर : प्रधानमंत्री
आंतरिक सुरक्षा पर यहां आयोजित मुख्यमंत्रियों के सम्मेलन में सिंह ने कहा, "पूर्वोत्तर के हालात में सुधार पिछले वर्ष की खास बात रही है। 2010 में हिंसा और मौतों के मामले में कमी आई है और मुझे बताया गया है कि कई वर्षो में हिंसा का स्तर अपने निम्नतम स्तर पर आ गया है।"
प्रधानमंत्री ने कहा, "मैंने बार-बार कहा है कि भारतीय संविधान उल्लेखनीय रूप से उदार है और विविध आकांक्षाओं को समाहित करने में सक्षम है। लेकिन जरूरी यह है कि शांति की वास्तविक इच्छा हो और हिंसा के रास्ते को छोड़ने की चाह हो।"
सिंह ने कहा कि सरकार उस किसी भी संगठन की मांग पर विचार करने को वचनबद्ध है, जो हिंसक संघर्ष छोड़ने को तैयार हो। सिंह ने कहा कि 2010 में कई संगठनों के साथ फलदायी आदान-प्रदान हुए हैं और सरकार इस वर्ष आदान-प्रदान की प्रक्रिया को जारी रखेगी।
प्रधानमंत्री से ठीक पहले गृह मंत्री पी.चिदम्बरम ने सम्मेलन को सम्बोधित किया। चिदम्बरम ने भी कहा कि पूर्वोत्तर के हालात में आश्चर्यजनक बदलाव आए हैं।
चिदम्बरम ने कहा, "कई वर्षो के दौरान 2010 में सबसे कम हिंसा हुई है। असम और मणिपुर को छोड़कर बाकी अन्य राज्यों में उल्लेखनीय सुधार दिखाई दिया है। नागालैंड या मिजोरम में किसी भी नागरिक की हत्या नहीं हुई है। मेघालय, अरूणाचल प्रदेश, नागालैंड या मिजोरम में कोई भी सुरक्षाकर्मी नहीं मारा गया है।"
चिदम्बरम ने कहा कि नौ विद्रोही संगठन या तो सरकार के साथ बातचीत की प्रक्रिया में हैं या बातचीत शुरू करने वाले हैं। चिदम्बरम ने कहा, "हमें या फिर विद्रोही समूहों को अपनी धारणाओं को बदलने का समय आ गया है।"
गृह मंत्री ने कहा, "चूंकि वे लम्बे समय से बातचीत करने और सम्मानजनक एवं उचित समझौतों के इच्छुक हैं, लिहाजा हमें उनके नेताओं के साथ सम्मानजनक और अच्छा बर्ताव करना चाहिए। हमें उनके कार्यकर्ताओं को समाज की मुख्यधारा में लौटने और नई जिंदगी शुरू करने का मौका देना चाहिए। हमें सुलह के लिए लोगों को तैयार करना चाहिए।"
चिदम्बरम ने कहा कि सरकार को उम्मीद है कि निकट भविष्य में कुछ संगठनों के साथ समझौता करने में वह सफल हो जाएगी।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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