'प्रदर्शनकारियों से निपटने के लिए अपनाए जाएंगे गैर घातक तरीके'

प्रधानमंत्री ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार द्वारा उठाए गए कई कदमों के बाद कश्मीर घाटी के हालात में सुधार हुआ है। सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल ने राज्य का दौरा किया और केंद्र सरकार द्वारा नियुक्त वार्ताकारों के दल ने अपने स्तर पर प्रयास किए।

आंतरिक सुरक्षा पर यहां आयोजित मुख्यमंत्रियों के चौथे सम्मेलन में सिंह ने कहा, "2010 की गर्मियों में जम्मू एवं कश्मीर राज्य में संकटपूर्ण स्थिति थी। वहां प्रदर्शनकारी पथराव कर रहे थे। विरोध प्रदर्शन के इस रूप ने हिंसा का एक दुष्चक्र पैदा कर दिया था। यह बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण और दुखद है कि सुरक्षा बलों द्वारा अपूर्व संयम बरते जाने के बावजूद कई युवक मारे गए थे और 1,500 से अधिक सुरक्षा कर्मी घायल हो गए थे।"

सिंह ने कहा, "आज घाटी के हालात में सुधार हुआ है। यह सुधार सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल के दौरे, सरकार द्वारा आठ सूत्रीय कार्य योजना की घोषणा करने और केंद्र सरकार व राज्य सरकार द्वारा संयुक्त रूप से उठाए गए कई सकारात्मक कदमों के बाद हुआ है। वार्ताकारों का दल भी लोगों के साथ संवाद शुरू करने के लिए विभिन्न वर्ग के लोगों के पास पहुंचने की कोशिश कर रहा है।"

प्रधानमंत्री ने कहा कि युवकों द्वारा किए गए पथराव ने केंद्रीय एवं राज्य पुलिस संगठनों में प्रतिक्रिया की ऐसी तकनीक विकसित करने की ओर ध्यान खींचा था, जिसके जरिए इस तरह के सार्वजनिक विरोध प्रदर्शनों और हिंसा से गैर घातक तरीके से निपटा जा सके।

सिंह ने कहा, "मुझे बताया गया है कि गृह मंत्रालय ने इस संदर्भ में आदर्श रणनीतिक प्रक्रिया तैयार की है और इस सम्मेलन के दौरान इस प्रक्रिया के बारे में राज्यों को जानकारी दी जाएगी।"

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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