नक्सलवाद, आतंकवाद, कट्टरवाद गम्भीर चुनौतियां : प्रधानमंत्री (लीड-1)

मनमोहन सिंह ने आंतरिक सुरक्षा पर यहां आयोजित मुख्यमंत्रियों के चौथे सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए कहा, "वामपंथी चरमवाद, सीमापार आतंकवाद, धार्मिक कट्टरवाद और जातीय हिंसा की गम्भीर चुनौतियां और खतरे अभी भी बने हुए हैं। हमें लगातार सतर्क रहना है और आतंकवाद एवं साम्प्रदायिक हिंसा के खिलाफ लड़ाई में अपने प्रयासों में कोई ढिलाई नहीं बरतनी है।"

सिंह ने कहा, "भारतीय संविधान उल्लेखनीय रूप से उदार है और विभिन्न आकांक्षाओं को समाहित करने में सक्षम है। जरूरत इस बात की है कि शांति की वास्तवित इच्छा हो और एकता के पथ पर चलने की चाह हो।"

प्रधानमंत्री ने कहा, "हमारी सरकार का यह वादा है कि यदि ये दोनों शर्ते पूरी होती हैं तो हम विभिन्न समूहों की उचित मांगों पर विचार करने में हर तरह से तत्परता दिखाएंगे।"

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा कि 2010 में हिंसक घटनाओं की संख्या में और वामपंथी चरमवादियों की हत्याओं में इसके पहले के वर्षो की बनिस्बत कमी आई। लेकिन नक्सली हिंसा के कारण नागरिकों की हत्याओं में बढ़ोतरी हुई।

सिंह ने कहा, "छत्तीसगढ़, बिहार, पश्चिम बंगाल और झारखण्ड हिंसक घटनाओं की संख्या के लिहाज से लगातार चिंता के विषय रहे हैं। उड़ीसा और महाराष्ट्र में भी स्थिति गम्भीर है। हमें केंद्रीय और राज्य स्तरीय सुरक्षा बलों के बीच संसाधनों और प्रतिक्रिया का एक सफल सामंजस्य स्थापित करने की आवश्यकता है।"

प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार ने नक्सलवाद प्रभावित इलाकों में विकास के लिए पर्याप्त कोष के साथ एक एकीकृत कार्य योजना तैयार की है। इसके तहत देश के 60 जनजातीय एवं पिछड़े जिलों को चुना गया है।

सिंह ने कहा कि देश को इस बात के लिए संतोष करने के हर कारण हैं कि कोई भी भड़काऊ घटना सामने नहीं आ रही है।

मनमोहन सिंह ने कहा, "राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद मामले में अदालत के फैसले के बाद समाज के हर वर्ग ने अभूतपूर्व संयम का परिचय दिया था। जनता की प्रतिक्रिया परिपक्व , सम्मानजनक और मर्यादित थी।"

मनमोहन सिंह ने कहा कि 2010 में कोई बड़ी साम्प्रदायिक घटना नहीं घटी और पुणे व वाराणसी की, दो घटनाओं को छोड़कर बाकी आतंकी हमलों की संख्या में भी काफी कमी आई।

सिंह ने कहा, "जहां खुफिया एजेंसियों और सुरक्षा बलों को इसका पूरा श्रेय लेने का हक है, वहीं इस बात पर गौर करना महत्वपूर्ण है कि यदि हमें आतंकवाद और साम्प्रदायिक हिंसा के खिलाफ अपनी लड़ाई में सफल होना है तो हमें लगातार सतर्क रहना चाहिए और अपने प्रयासों में कोई ढिलाई नहीं बरतनी चाहिए।"

प्रधानमंत्री ने कहा कि जम्मू एवं कश्मीर के हालात में पिछले चार महीनों के दौरान व्यापक सुधार हुआ है और यह सुधार राज्य और केंद्र सरकार द्वारा उठाए गए कदमों के कारण हुआ है।

प्रधानमंत्री ने हालांकि कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण था कि विरोध प्रदर्शनों के दौरान सुरक्षा बलों द्वारा संयम बरतने के बावजूद कई युवकों को अपनी जिंदगी से हाथ धोना पड़ा था।

मनमोहन सिंह ने कहा, "सर्वदलीय दौरे, सरकार द्वारा आठ सूत्री कार्यक्रम की घोषण और राज्य व केंद्र सरकार द्वारा किए गए उपायों के बाद पिछले चार महीनों में जम्मू एवं कश्मीर के हालात में व्यापक सुधार हुआ है।"

सिंह ने कहा कि सीमावर्ती जम्मू एवं कश्मीर राज्य अपनी बेहतरी की ओर बढ़ चला है। जम्मू एवं कश्मीर पर राजनीतिक बहस को बदलने में वरिष्ठ पत्रकार दिलीप पांडगांवकर के नेतृत्व में तीन वार्ताकारों के प्रयासों का असर हुआ है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि राज्य में पथराव के दौरान सुरक्षा बलों ने काफी संयम का परिचय दिया था।

ज्ञात हो कि पिछले वर्ष कश्मीर में सुरक्षा बलों के साथ संघर्ष में 100 से अधिक लोग मारे गए थे।

पूर्वोत्तर के हालात पर प्रधानमंत्री ने कहा कि वहां राज्यों में स्पष्ट बदलाव दिखाई दे रहे हैं। कई वर्षो से वहां हिंसा का स्तर बहुत नीचे आ गया है।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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