क्षुद्र ग्रह के टकराने से बृहस्पति पर विशाल सुराख

यह पहली बार हुआ है जब किसी क्षुद्र ग्रह को इससे टकराते देखा गया है। पहले यह समझा गया था कि हिम धूमकेतु गुरुत्वाकर्षण वाले क्षेत्र में खिंचे चले आने के बाद इस ग्रह से टकराए होंगे।

शोधकर्ताओं का कहना है कि यह खोज पहेलीनुमा है और इस बात की याद दिलाती है कि सौरमण्डल जटिल और प्रचंड जगह है।

समाचार पत्र 'डेलीमेल' के अनुसार 19 जुलाई 2009 को आस्ट्रेलिया के न्यू साउथ वेल्स में खगोलविद एंथनी वेसली ने अपनी वैधशाला में पहले पहल इस प्रभाव को देखा था।

पहले तो उन्हें लगा कि यह काला धब्बा है लेकिन सही कोण से देखने पर उन्हें समझ में आया कि यह बिल्कुल काला है यानी किसी के टकराने का प्रभाव है।

वेसली ने अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा से सम्पर्क किया जो अब तक इस बात को लेकर दुविधा में थी कि ग्रह की सतह पर यह धब्बा कैसे बना।

बृहस्पति के वातावरण की जांच करने के लिए शोधकर्ताओं ने तीन इंफ्रारेड कैमरे, कुछ गैसों का मिश्रण और रासायनिक परिस्थितियों का इस्तेमाल किया।

वे इस नतीजे पर पहुंचे कि क्षुद्र तारे के टकराते समय पांच गीगाटन के बराबर टीएनटी निकला होगा और उसका मलबा इतना ऊंचा उठा होगा कि बादलों पर जम गया होगा।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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