श्याबाओ नोबेल समारोह में मौजूद नहीं होंगे

श्याबाओ नोबेल समारोह में मौजूद नहीं होंगे
चीन ने समारोह में भाग ले रहे देशों की आलोचना की है.

नॉर्वे में नोबेल पुरस्कार देने वाली समिति ने कहा है कि इस साल का शांति पुरस्कार चीन की जेल में कैद ल्यो श्याबाओ को दिए जाने का मतलब चीन पर पश्चिमी मूल्यों को थोपना नहीं है.

समिति के अध्यक्ष तोब्योर्न याग्लेन का कहना था कि ये पुरस्कार चीन के ख़िलाफ़ नहीं है लेकिन एक संकेत है कि चीन आर्थिक प्रगति के साथ-साथ राजनीतिक सुधारों को भी प्राथमिकता दे.

शुक्रवार को नोर्वे की राजधानी ऑस्लो में नोबेल शांति पुरस्कार समारोह आयोजित हो रहा है लेकिन ल्यो श्याबाओ की कुर्सी खाली रहेगी क्योंकि वे चीन में जेल में क़ैद हैं. चीन ने उन देशों की कड़ी आलोचना की है जिन्होंने ल्यो श्याबाओ का समर्थन किया है.

अमरीकी प्रतिनिधिसभा ने जब एक प्रस्ताव पारित कर ल्यो श्याबाओ को बधाई दी तो चीन ने इसे अपने आंतरिक मामलें में दख़ल बताया. ग़ौरतलब है कि इस समारोह के दौरान कई ऐसे देशों के प्रतिनिधिओं भी मौजूद नहीं होंगे जिन्हें आमंत्रित किया गया है लेकिन वे ल्यो श्याबाओ को सम्मान दिए जाने पर चीन के रुख़ का समर्थन कर रहे हैं.

भारत ने कहा है कि उसके प्रतिनिधि समारोह में मौजूद होंगे. एक और नोबेल शांति पुरस्कार विजेता बर्मा की ऑंग साँ सू ची भी उन्हें दिए गए सम्मान समारोह के दौरान जेल में बंद थीं. उन्होंने श्याबाओ के साथ संवेदना जताते हुए कहा, "ये दुखद है...बहुत दुखद. एक मनुष्य होने के नाते मैं शियाबो के प्रति अपना हाथ बढ़ाना चाहती हूँ. नोबेल पुरस्कार से हमारे आंदोलन को और देश के बार रह रहे लोकतंत्र के पक्षधरों को बहुत मदद मिली थी."

उधर नोबेल सम्मान समिति के अध्यक्ष तोब्योर्न याग्लेन का कहना था, "ये बात सही है की लोकतंत्र के कई रास्ते हो सकते हैं लेकिन लोकतंत्र बिना अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के नहीं हो सकता. ये महज़ कुछ पश्चिमी मूल्यों भर की बात नहीं है, ये सार्वभौमिक मूल्य हैं."

उनका कहना था, "..खाली कुर्सी का अर्थ है की सम्मान विजेता समारोह में शिरकत नहीं कर सकते...ये केवल एक प्रतीक है पर ये बहुत ही ताकतवर प्रतीक है और ये दर्शाता है की चुनाव कितना सही है." सम्मान समिति का ये भी कहना है की चीन का ऑस्लो में दूतवास अन्य देशों को सम्मान समारोह में जाने से रोकने के बहुत प्रयास कर रहा है.

इस बीच अमरीका की विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन ने कहा है, "अमरीका समारोह में मौजूद रहेगा, हालाँकि ना तो सम्मान विजेता ना उनकी पत्नी को चीन के बाहर जाने की अनुमति दी गई है. हम चीन को देश के भीतर राजनितिक विचारों के आदान प्रदान के स्वतंत्र लेन-देन के लिए वातावरण बनाने के लिए उत्साहित करते रहगें."

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