बिजली संकट दूर करेगा भारत-फ्रांस परमाणु समझौता

भारत-फ्रांस के बीच हुए इस समझौते का अगर कोई विपक्षी पार्टी विरोध करती है, तो यह समझ लीलिए कि वो पार्टी देश को विकास की ओर ले जाने के बजाए सिर्फ राजनीतिक रोटियां सेंकना चाहती है। सोमवार को हुए समझौते के अंतर्गत परमाणु विद्युत संयत्र लगाने वाली सबसे बड़ी कंपनी एरेवा भारतीय कंपनियों के साथ मिलकर यहां के छह परमाणु रिएक्टर संयंत्रों को अधिक शक्तिशाली बनाएगी।
दोगुनी से ज्यादा बिजली का उत्पादन
इस परियोजना पर जनवरी 2011 से काम शुरू हो जाएगा। खास बात यह है कि 25 वर्ष के इस अनुबंध के अंतर्गत फ्रांस के सहयोग से भारत अपने परमाणु संयंत्रों पर दोगुनी से ज्यादा बिजली का उत्पादन कर सकेगा। यही नहीं महाराष्ट्र के जैतपुर में लगने वाले नए संयंत्र पर पैदा होने वाली बिजली अलग से जुड़ेगी। फिलहाल भारत के छह परमाणु विद्युत ऊर्जा संयंत्रों में करीब 4000 मेगावॉट बिजली का उत्पादन हो रहा है। इस परियोजना के बाद उत्पादन बढ़कर 10000 मेगावॉट हो जाएगा।
विशेषज्ञों की मानें तो नई परियोजना के शुरू होते ही देश में बिजली का संकट 50 प्रतिशत तक हल हो सकेगा। यही नहीं आने वाले समय में अगर भारत एक-दो परियोजनाएं और शुरू कर देता है तो देश में कहीं भी बिजली का संकट नहीं रहेगा।
आखिर क्यों हो रहा है विरोध
महाराष्ट्र की राजनीतिक पार्टी महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना जैतपुर में परमाणु विद्युत संयंत्र लगाने का जबर्दस्त विरोध कर रही है। सच पूछिए तो मनसे को इस बात का अंदाजा नहीं है कि इस संयंत्र के लगने के बाद उन्हीं के महाराष्ट्र में सबसे पहले बिजली संकट का अंत होगा। यही नहीं उनके राज्य की अर्थव्यवस्था अन्य के मुकाबले और ज्यादा मजबूत होगी। लेकिन इन सभी बातों से अंजान मनसे ने 7 जनवरी को राज्य-व्यापी प्रदर्शन की घोषणा कर दी है। अब देखना यह है कि ऐसी विकासशील परियोजनाओं के प्रति मनसे जैसी पार्टियों की आंख कब खुलती है।
ऐसी परियोजनाओं का विरोध करने वाली पार्टियों का क्या करना चाहिए? इस सवाल पर अपनी टिप्पणी नीचे कमेंट बॉक्स में लिखें।












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