भारतीय मूल के वैज्ञानिक ने बनाया कृत्रिम गुर्दा, प्रयोग की तैयारी

वाशिंगटन, 3 दिसम्बर (आईएएनएस)। गुर्दा (किडनी) की खराबी से पीड़ित दुनिया भर के लाखों मरीजों के इलाज का रास्ता लेकर आ रहा है एक भारतीय मूल के एक अमरिकी वैज्ञानिक द्वारा तैयार कृत्रिम गुर्दा। चाय के कप के आकार के इस कृत्रिम गुर्दे का अब इंसानों और जानवरों पर प्रयोग की तैयारी चल रही है।

सैन फ्रांसिस्को के कैलीफार्निया विश्वविद्यालय में शुवो राय इंजीनियरों, जीवविज्ञानियों और चिकित्सकों के एक दल के साथ गुर्दे का काम करने वाले इस उपकरण का आकार छोटा करने पर काम कर रहे हैं। वे इंसानों और बड़े जानवरों पर इसके प्रयोग की बात से काफी उत्साहित हैं।

उन्होंने कहा कि यदि वित्तीय सुविधा बनी रही तो पांच सालों के भीतर इसे प्रयोग के लिए जानवरों और इंसानों में प्रत्यारोपित किया जा सकेगा।

यदि इंसानों पर यह प्रयोग सफल रहता है, तो डायलिसिस पर रहने वाले लोगों को काफी राहत मिलेगी।

विश्वविद्यालय के एसोसिएट प्रोफेसर ने आईएएनएस से कहा कि इसके प्रयोग के लिए एक दल और वित्तीय सहयोग की जरूरत होगी। दल तो हमारे पास है और वित्तीय व्यवस्था की कोशिश जारी है।

भारत और बांग्लादेश से संबंध रखने वाले शुवो राय ने कहा कि दुनिया भर में अभी लगभग 15 लाख लोग डायलिसिस पर जी रहे हैं। मधुमेह और उच्च रक्तचाप वाले रोगियों में कई बार यह अवस्था आ जाती है।

राय का जन्म वर्तमान बांग्लादेश में हुआ था। उनका बचपन बांग्लादेश और भारत में बीता। शिक्षा-दीक्षा यूगांडा में हुई, जहां उनके पिता चिकित्सक थे। यूगांडा के बाद की पढ़ाई ओहायो के एलायंस में माउंट यूनियन महाविद्यालय से हुई।

उन्होंने कहा कि उनके पिता पक्ष के लोग भारत में और मां पक्ष के लोग बांग्लादेश में रहते हैं।

गुर्दे के मरीजों में किसी अन्य के गुर्दे का प्रत्यारोपण करना पड़ता है, जिसमें काफी जटिलताएं हैं। कृत्रिम गुर्दे से ये जटिलताएं कम होने की उम्मीद की जा रही है।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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