बिना हिंसा 52 प्रतिशत वोटिंग! वाकई बदल गया बिहार

राज्य में प्रथम चरण में मतदान 54 प्रतिशत, दूसरे चरण में 52.55, तीसरे चरण में 53.65, चौथे चरण में 51.10, पांचवे चरण में 50 प्रतिशत और छठे चरण में 51 प्रतिशत से अधिक मतदान हुआ। इन सभी जगह काफी कम हिंसक वारदातों की खबरें मिलीं, जबकि पांच साल पहले तक आलम यह था कि मतदान के दौरान बूथ कैपचरिंग, हत्या, बंदूक की नोक पर वोट डलवाना, पोलिंग बूथ पर मारपीट, दंगा-फसाद, आदि की घटनाएं आम हुआ करती थीं।
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राज्य में शांतिपूर्ण चुनाव का मतलब अभी से दर्शाने लगा है कि बिहार वाकई में बदल गया है। सवाल यह भी उठता है कि आखिर बिहार में इतने अच्छे मतदान का श्रेय आखिर किसे जाता है? चुनाव आयोग को, राज्य पुलिस को, केंद्र सरकार को या फिर राज्य सरकार को। कुल मिलाकर देखा जाए तो यह टीम वर्क का ही नतीजा है। चुनाव आयोग की बेहतरीन रणनीति और राज्य पुलिस की व्यवस्था। साथ में केंद्र द्वारा भेजे गए सुरक्षा बलों द्वारा मुहैया करायी गई चाक चौबंध सुरक्षा व्यवस्था ने हिंसा रूपी परिंदे को पर तक नहीं मारने दिया। अंत में श्रेय हाता है बिहार की मौजूदा सरकार को, जिसने पूरी जिम्मेदार के साथ मतदान कराए।
इसके सामाजिक पहलु पर नज़र डालें तो यहां के लोग अब राजनीतिक उठापटक से ज्यादा विकास पर विश्वास करने लगे हैं। पिछले कई दशकों से बाहर जाकर काम कर रहे बिहारवासी अब चाहते हैं कि उन्हीं के राज्य में रोजगार सृजित हों। मतदान में लोगों की सहभागिता ने इन सब बातों पर पक्की मुहर लगा भी दी है।
आप इसका श्रेय किसे देंगे, अपनी राय नीचे कमेंट बॉक्स में लिखें।












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