आखिर 2G घोटालों पर शांत क्यों हैं मनमोहन?
अदालत ने मंगलवार को जनता पार्टी के अध्यक्ष सुब्रमण्यम स्वामी की याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि आखिर प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) ने इस मामले में कोई कार्रवाई किए जाने में इतनी देरी क्यों की। तथ्यों के बावजूद कोई कदम क्यों नहीं उठाया गया। कोर्ट ने नोटिस जारी करते हुए केन्द्र सरकार से इस बारे में जवाब मांगा है। सरकार 18 नवंबर को जवाब दे सकती है। इस बीच, कांग्रेस ने इस मामले में कोई टिप्पणी करने से इनकार कर दिया है।
न्यायालय ने कहा कि यह प्रधानमंत्री की 'निष्क्रियता और चुप्पी का मामला है।' डॉ. स्वामी ने 29 नवम्बर 2008 को तत्कालीन दूरसंचार मंत्री ए. राजा के खिलाफ भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम के तहत कार्रवाई शुरू करने के लिए मंजूरी प्राप्त करने के लिए प्रधानमंत्री को आवेदन दिया था।
इसके बाद 19 मार्च 2010 को स्वामी को जवाब मिला जिसमें प्रधानमंत्री ने कहा कि 2जी स्पेक्ट्रम आवंटन मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की जांच चल रही है, इसलिए अभी राजा के खिलाफ कार्रवाई की मंजूरी देने के मामले में इस आवेदन पर निर्णय करना अपरिपक्व होगा।
न्यायालय ने 19 मार्च 2010 के प्रधानमंत्री के पत्र में शामिल किए गए 'अपरिपक्व' शब्द पर भी आपत्ति जताई। न्यायालय ने कहा कि यह कहा जा सकता था कि कोई निर्णय लेने के लिए स्वामी द्वारा उपलब्ध कराए गए दस्तावेज अपर्याप्त है लेकिन यह कहा गया कि आवेदन अपरिपक्व है।न्यायालय ने कहा, "कार्रवाई की मांग करना लोकतंत्र में लोगों को दिया गया अधिकार है, और आपने कहा है कि उनका यह अधिकार परिपक्व नहीं है।"













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