पाकिस्तान: सिंध में हिंदू बच्चों के अपहरण की घटनाएं बढ़ी

पुलिस ने 35 दिन पहले अगवा हुए पांच वर्षीय बच्चे धीरज को हाल ही में अपहरणकर्ताओं के चंगुल से छुड़वाया था। बच्चे की सकुशल वापसी के लिए अपहर्ताओं ने एक करोड़ रुपये की फिरौती मांगी थी।
धीरज के चाचा उदय चंद ने कहा, "धीरज को ईद के दिन ही हमारे सामने से ही उठा लिया गया था।" बाद में पुलिस ने सभी अपहरणकर्ताओं को गिरफ्तार कर लिया था। बच्चे के सुरक्षित लौट आने की खुशी तो परिजनों के चहरे पर दिख रही है लेकिन उन्होंने कंधकोट को छोड़ कहीं और जाने का फैसला कर लिया है।
ये लोग यहां पर कई पीढ़ियों से रह रहे थे। अखबार 'डेली एक्सप्रेस ट्रिब्यून' में छपी खबर के मुताबिक धीरज अकेला ऐसा भुक्तभोगी नहीं है बल्कि वह पहला ऐसा अपहृत बच्चा है जिसे फिरौती दिए बिना ही छुड़ा लिया गया।
इस साल की शुरुआत से ही कम से कम आठ बच्चों का अपहरण हो चुका है और उन सबकी सुरक्षित रिहाई तभी संभव हो पाई जब उनके परिजनों ने अपराधियों को फिरौती की रकम अदा की।
क्षेत्र में रह रहे हिन्दुओं के मुताबिक चार साल के पीर चंद को दो लाख रुपये की फिरौती देकर छुड़ाया गया तो पांच साल के पीयूष को मुक्त कराने के लिए उसके परिजनों को 330,000 रुपये देने पड़े।
ऐसे बहुत सारे बच्चे हैं जिन्हें अपहरणकर्ताओं के चंगुल से छुड़वाने के लिए बच्चों के परिजनों को लाखों रुपये देने पड़े। ये ऐसे मामले हैं जिनकी शिकायत पुलिस के पास दर्ज कराई गई थी। मगर ऐसा माना जा रहा कि ऐसे कई और मामले होंगे जिनकी शिकायत पुलिस में दर्ज नहीं की गई होगी।












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