दोबारा विश्वास मत के लिए तैयार येदियुरप्‍पा

BS Yeddyurappa
नई दिल्ली/बेंगलुरू। कर्नाटक में जारी राजनीतिक संकट के बीच राज्यपाल हंसराज भारद्वाज की सलाह स्वीकार करते हुए मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा 14 अक्टूबर को विधानसभा में दोबारा बहुमत साबित करने के लिए तैयार हो गए हैं। इस बीच कर्नाटक उच्च न्यायालय ने अयोग्य ठहराए गए विधायकों के मामले में फैसला सुरक्षित रख लिया है।

येदियुरप्पा ने विधायकों सहित नई दिल्ली में वरिष्ठ भाजपा नेता लालकृष्ण आडवाणी के आवास पर पार्टी की कोर समिति से मुलाकात के बाद संवाददाताओं को बताया, "मुझे 14 अक्टूबर को दोबारा विश्वास मत के लिए सुझाव दिया गया है। मैंने विधानसभा अध्यक्ष से दोबारा सदन की बैठक बुलाने के लिए कहा है। मुझे विश्वास मत जीतने का भरोसा है, क्योंकि मैंने 11 अक्टूकर को विश्वास मत जीता था।"

मुख्यमंत्री के सचिव आई.एस.एन. प्रसाद ने राज्यपाल के पत्र के जवाब में मंगलवार को लिखा, "मुख्यमंत्री 14 अक्टूबर को सदन में बहुमत साबित करने के लिए तैयार हैं।"

इससे पहले राज्यपाल ने राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू किए जाने की अनुशंसा करने के एक दिन बाद मुख्यमंत्री को लिखे एक पत्र में कहा, "यदि आप दोबारा विश्वास मत पेश करना चाहते हैं, तो मैं आपको सदन में 14 अक्टूबर को सुबह 11 बजे तक बहुमत साबित करने का एक और मौका देता हूं।"

भारद्वाज ने कहा है कि विश्वास प्रस्ताव का समर्थन करने वाले और विरोध करने वाले विधायकों की संख्या दर्ज नहीं की गई। फैसला ध्वनि मत से किया गया और पूरी कार्यवाही वर्दीधारी पुलिसकर्मियों की उपस्थिति में तमाशा बन गई और सदन में भारी हंगामा हुआ।

पत्र में कहा गया है, "विधानसभा की सोमवार की कार्यवाही का बारीकी से निरीक्षण करने पर पता चलता है कि आपने सदन पटल पर बहुमत साबित करने के लिए कोई गंभीर प्रयास नहीं किया। इस परिस्थिति में आपका कर्तव्य बनता है कि विधानसभा में स्पष्ट एवं निष्पक्ष रूप से यह दिखाएं कि सदन में आपके पास बहुमत है।"

राज्यपाल ने कहा है, "सोमवार को जब 10.05 और 10.10 बजे के बीच कार्यवाही चली तो उस समय सदन व्यवस्थित नहीं था। ऐसे बाहरी लोग भी सदन में मौजूद थे, जिन्हें वहां होने का अधिकार नहीं है। इस बात की भी शिकायतें थीं कि जो लोग विधानसभा सदस्य नहीं हैं वे भी ध्वनि मत में शामिल थे।"

राज्यपाल ने राजभवन में जल्दबाजी में बुलाए गए एक संवाददाता सम्मेलन में कहा, "मुख्यमंत्री को मेरी यह सलाह मित्रवत है। यद्यपि चंद दिनों बाद दोबारा विश्वास मत अयोजित करना एक अभूतपूर्व घटना होगी, क्योंकि संविधान में इस तरह का कोई प्रावधान नहीं है। लेकिन यह नैतिकता और सार्वजनिक जीवन में ईमानदारी बनाए रखने का प्रश्न है।"

भारद्वाज ने कहा कि उन्होंने एस.आर.बोम्मई बनाम केंद्र सरकार के मामले में सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के मद्देनजर येदियुरप्पा से सदन में बहुमत साबित करने के लिए कहा। राज्यपाल ने कहा कि स्वतंत्र एवं निष्पक्ष विश्वास मत कराया जाना सदन में सरकार के लिए बहुमत साबित करने का सर्वोत्तम तरीका माना जाता है।

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