येदियुरप्पा 11 अक्टूबर को बहुमत साबित करेंगे (राउंडअप)
राजभवन के बाहर येदियुरप्पा ने संवाददाताओं से कहा, "मैंने राज्यपाल हंसराज भारद्वाज से 11 अक्टूबर को विधानसभा सत्र आयोजित करने की मांग की है जिससे बहुमत साबित किया जा सके।"
इससे पहले राज्यपाल ने बहुमत साबित करने के लिए येदियुरप्पा को 12 अक्टूबर तक का समय दिया था।
यह नौबत इसलिए आई क्योंकि सरकार को समर्थन दे रहे पांच निर्दलीय और सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के 14 सहित कुल 19 विधायकों ने राज्यपाल को पत्र सौंपकर सरकार से समर्थन वापस लेने की बात कही।
प्रदेश की राजनीति में अचानक आए इस बदलाव ने दक्षिण भारत में भाजपा की पहली सरकार को एक बार फिर संकट में डाल दिया है।
राजभवन के सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, "सात मंत्रियों सहित 19 विधायकों द्वारा समर्थन वापसी का पत्र सौंपे जाने के मद्देनजर राज्यपाल ने मुख्यमंत्री से 12 अक्टूबर शाम पांच बजे तक या उससे पहले बहुमत साबित करने को कहा है।"
इस बीच, येदियुरप्पा ने राज्यपाल से समर्थन वापस लेने वाले चार मंत्रियों को मंत्रिपरिषद से बर्खास्त करने की सिफारिश की है। ये चारों मंत्री निर्दलीय विधायक हैं। इन्होंने कर्नाटक में भाजपा की पहली सरकार बनाने में मदद की थी इसलिए इन्हें मंत्री पद से नवाजा गया था।
येदियुरप्पा ने संवाददाताओं से बातचीत में कहा, "मैंने राज्यपाल से लघु उद्योग मंत्री शिवराज एस. तांगाडागी, वस्त्र व रेशम उद्योग मंत्री वेंकटरमनप्पा, समाज कल्याण मंत्री ए. नारायण स्वामी और युवा व जेल मामलों के मंत्री डी. सुधाकर को मंत्रिपरिषद से हटाए जाने की सिफारिश है। इन विधायकों ने मेरी सरकार पर अविश्वास जताया है।"
इन मंत्रियों को बर्खास्त करने का फैसला कैबिनेट की आपात बैठक में लिया गया। विधायकों द्वारा राज्यपाल को समर्थन वापसी का पत्र सौंपे जाने के बाद यह बैठक बुलाई गई थी।
मुख्यमंत्री ने राज्यपाल को सौंपे गए समर्थन वापसी के पत्र पर हस्ताक्षर करने वाले पार्टी के विधायकों को सलाह दी कि वे पार्टी से निष्कासन सहित अन्य अनुशासनात्मक कार्रवाई से बचने के लिए अपने फैसले पर पुनर्विचार करें।
उल्लेखनीय है कि 225 सदस्यीय कर्नाटक विधानसभा में 19 विधायकों के समर्थन वापसी के पत्र से सत्ताधारी भाजपा सरकार अल्पमत में आ गई है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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