उप्र को मानसून ने बोला अलविदा
प्रदेश में इस साल मानसून ने अपनी निर्धारित तारीख 15 जून से 20 दिन बाद प्रवेश किया। देरी के बावजूद प्रदेश में मानसून की सामान्य बारिश 88 फीसदी रही। मौसम विभाग के आंकड़ों के मुताबिक राज्य में हर साल की 21 सितम्बर तक की 820 मिलीमीटर बारिश के औसत के सापेक्ष 722 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई।
राज्य में सबसे अधिक बारिश 1449 मिलीमीटर मुरादाबाद जिले में रिकार्ड की गई, जो सामान्य से करीब 70 फीसदी अधिक थी। कौशांबी राज्य का इकलौता जिला रहा, जहां सामान्य से 50 फीसदी कम बारिश हुई।
मौसम विज्ञानियों के अनुसार अरब सागर से आने वाला मानसून राज्य में प्रवेश करने के बाद कमजोर नहीं पड़ा, जिस कारण पश्चिमी उत्तर प्रदेश में उम्मीद से अधिक बारिश हुई। पूर्वी उत्तर प्रदेश में तुलनात्मक दृष्टि से कम बारिश इसिलए हुई क्योंकि बंगाल की खाड़ी से आना वाला मानसून अरब सागर से आने वाले मानसून के मुकाबले कमजोर था।
बारिश के चलते प्रदेशवासियों को इस साल बाढ़ का कहर झ्झेलना पड़ा। गंगा, यमुना, रामगंगा, कोसी, घाघरा, शारदा और सरयू नदियों के उफान पर आने से पूर्व, पश्चिम और तराई क्षेत्र के करीब 30 जिलों के 20 लाख से ज्यादा लोग बाढ़ से प्रभावित हुए।













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