आखिरी सांस तक लड़ाई जारी रखूंगा : मट्ट
न्यायालय ने प्रियदर्शिनी के हत्यारे संतोष कुमार सिंह की मौत की सजा को उम्रकैद में तब्दील कर दिया। यह फैसला आने के बाद सेवानिवृत्त इंजीनियर मट्ट ने आईएएनएस से कहा, "यह मेरी जिंदगी का सबसे दुखद दिन है। सर्वोच्च न्यायालय ने मेरे और मेरी बेटी के साथ इंसाफ नहीं किया है।"
उन्होंने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय को चाहिए था कि वह दिल्ली उच्च न्यायालय के फैसले को बरकरार रखता और अभियुक्त को फांसी के फंदे तक भेजता। मट्टू ने कहा कि वह 'पूरी तरह से बिखरा' महसूस कर रहे हैं।
मट्ट ने कहा, "मैं अपनी बेटी के लिए इंसाफ की लड़ाई नहीं छोड़ूंगा। आखिरी सांस तक इस मामले की लड़ाई जारी रखूंगा।"
संतोष ने दिल्ली विश्वविद्यालय में अपनी कनिष्ठ प्रियदर्शिनी मट्टू की दुष्कर्म के बाद हत्या कर दी थी। 23 जनवरी, 1996 को मट्ट का शव उसके एक रिश्तेदार के वसंत कुंज स्थित एक फ्लैट से बरामद किया गया था। इस मामले में अक्टूबर, 2006 में संतोष को दिल्ली उच्च न्यायालय ने मौत की सजा सुनाई थी। संतोष एक पूर्व वरिष्ठ पुलिस अधिकारी का बेटा है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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